जांजगीर चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
जिला जांजगीर-चांपा , 01 जनवरी 2025।
छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार जिले में शासकीय कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, अनुशासित एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल की गई है। जांजगीर-चांपा कलेक्टोरेट सहित समस्त विभागों में आधार-आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस प्रणाली लागू कर दी गई है। इस व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत स्वयं कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे द्वारा बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कर की गई, जो प्रशासनिक अनुशासन का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

अनुशासन की नई शुरुआत
अब तक शासकीय कार्यालयों में उपस्थिति पंजी (रजिस्टर) या मैन्युअल प्रणाली पर निर्भरता रही है, जिसमें लापरवाही और अनियमितता की संभावनाएं बनी रहती थीं। बायोमेट्रिक अटेंडेंस प्रणाली के लागू होने से समयपालन सुनिश्चित होगा और प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी की उपस्थिति का डिजिटल एवं सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
कलेक्टर का स्पष्ट संदेश
कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे ने इस अवसर पर कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली केवल उपस्थिति दर्ज करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त उपकरण है। इससे कर्मचारियों में जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी और आम नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्राप्त होंगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासन की मंशा है कि शासकीय कार्यालयों में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता बने। बायोमेट्रिक अटेंडेंस से फर्जी उपस्थिति, विलंब से कार्यालय आने और समय से पहले कार्यालय छोड़ने जैसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

डिजिटल प्रशासन की ओर कदम
यह पहल ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘गुड गवर्नेंस’ की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। आधार-आधारित प्रणाली से न केवल उपस्थिति का सत्यापन होगा, बल्कि भविष्य में इसे वेतन, अवकाश और सेवा अभिलेखों से जोड़कर प्रशासनिक कार्यों को और अधिक सुव्यवस्थित किया जा सकेगा।
जनता को होगा सीधा लाभ
कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होने से आम नागरिकों को अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। फाइलों का समय पर निराकरण होगा, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
अन्य जिलों के लिए उदाहरण
जांजगीर-चांपा जिले में बायोमेट्रिक अटेंडेंस की प्रभावी शुरुआत अन्य जिलों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल बन सकती है। कलेक्टर द्वारा स्वयं आगे बढ़कर इस व्यवस्था को अपनाना अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि अनुशासन सभी के लिए समान है।
बायोमेट्रिक अटेंडेंस प्रणाली का क्रियान्वयन केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार
बायोमेट्रिक अटेंडेंस प्रणाली का क्रियान्वयन केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह पहल आने वाले समय में जिले की कार्यसंस्कृति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।







