बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
भानुप्रतापपुर। नगर के पत्रकारों के लिए स्वीकृत ‘पत्रकार भवन’ पिछले तीन वर्षों से अधर में लटका हुआ है। हैरानी की बात यह है कि भवन अभी तक पूर्ण नहीं हुआ है, लेकिन कागजों पर इसका ‘मेजरमेंट’ (माप) पूरा कर लिया गया है। इस मामले में नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और प्रेस क्लब के सदस्यों ने भ्रष्टाचार की आशंका जताई है।
तीन साल बाद भी ढांचा अधूरा
भानुप्रतापपुर प्रेस क्लब के लिए शासन द्वारा स्वीकृत इस भवन का निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा है। तीन साल बीत जाने के बाद भी भवन उपयोग के लायक नहीं बन पाया है। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि निर्माण कार्य में हो रही देरी से न केवल पत्रकारों को असुविधा हो रही है, बल्कि सरकारी धन का भी दुरुपयोग हो रहा है।
बिना काम पूरा हुए कागजों पर ‘मेजरमेंट’ क्लोज
इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि निर्माण स्थल पर काम अभी भी बाकी है, लेकिन विभाग द्वारा इसका मेजरमेंट (मूल्यांकन) पूरा दिखाया जा चुका है। नियमतः कार्य पूर्ण होने के बाद ही अंतिम मेजरमेंट किया जाता है, लेकिन यहाँ बिना कार्यक्रम या फिनिशिंग के ही कागजी खानापूर्ति कर ली गई है। यह सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।
स्टेटमेंट छुपा रही है नगर पंचायत
प्रेस क्लब के सदस्यों ने इस संबंध में नगर पंचायत से कई बार ‘वर्क स्टेटमेंट’ की मांग की है। सदस्यों का आरोप है कि:
* निर्माण कार्य स्टेटमेंट (प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के आधार पर नहीं किया गया है।
* बार-बार पूछने के बावजूद नगर पंचायत के अधिकारी स्टेटमेंट दिखाने से बच रहे हैं।
* प्रेस क्लब को अंधेरे में रखकर निर्माण में घटिया सामग्री या बजट की हेराफेरी की आशंका है।
प्रेस क्लब में आक्रोश
भानुप्रतापपुर प्रेस क्लब के सदस्यों का कहना है कि अगर निर्माण नियमानुसार हुआ है, तो प्रशासन स्टेटमेंट सार्वजनिक करने से क्यों कतरा रहा है? सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भवन का कार्य पूर्ण नहीं किया गया और स्टेटमेंट के आधार पर जांच नहीं हुई, तो वे इस मामले को लेकर उच्च अधिकारियों और शासन तक अपनी बात पहुंचाएंगे।
यह पत्रकारों के हक के साथ खिलवाड़ है। अधूरी बिल्डिंग का मेजरमेंट पूरा कर लेना बताता है कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा घालमेल है। हम पारदर्शिता की मांग करते हैं।”
— प्रेस क्लब अध्यक्ष, भानुप्रतापपुर
प्रमुख बिंदु जो जांच के घेरे में हैं:
1. समय सीमा: 3 साल में भी काम पूरा क्यों नहीं हुआ?
2. मेजरमेंट बुक (MB): अधूरा काम होने पर भी फाइनल मेजरमेंट कैसे दर्ज किया गया?
3. गोपनीयता: नगर पंचायत वर्क स्टेटमेंट को सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही है?









