बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
झूलों में लगी जंग, गायब हो गई हरियाली, निर्माण अधूरे, उखड़ गई सड़क
अब रंगरोगन कर सच्चाई छुपाने की हो रही कोशिश
भानुप्रतापपुर। नगर को हरियाली, पर्यटन और पर्यावरणीय पहचान देने के उद्देश्य से जिस नेचर पार्क का सपना देखा गया था, उसका फ्यूचर अभी से खराब हो गया है। पार्क का अभी लोकार्पण हुआ भी नहीं है और वह उजाड़ हो चला है। करोड़ों रुपये की शासकीय राशि खर्च होने के बावजूद पार्क न तो उपयोग योग्य है और न ही सुरक्षित। जंग खा चुके झूले, उखड़े हुए रास्ते, सूखती हरियाली और अधूरे निर्माण कार्य इस बात की गवाही दे रहे हैं कि इस प्रोजेक्ट में घोर विभागीय लापरवाही बरती गई है और जमकर भ्रष्टाचार किया गया है।

पूर्व वनमंडल द्वारा विगत तीन वर्षो से कछुआ चाल से नेचर पार्क बनाया जा रहा है। समय पर उद्घा्टन नहीं किए जाने से बंद पड़े नेचर पार्क की हालत दयनीय हो गई है।फिर से नेचर पार्क में अब अचानक उस समय काम तेज कर दिया गया है, जब लगभग पूरी राशि खर्च हो चुकी है और केवल नाममात्र का बजट शेष बचा है। नवनियुक्त वन मंडलाधिकारी के आते ही एसडीओ और रेंजर स्तर के अधिकारी जिस तरह से सक्रिय दिख रहे हैं, उसने पूरे मामले को और भी संदेहास्पद बना दिया है। स्थानीय नागरिक इसे आखिरी समय की खानापूर्ति बता रहे हैं। अचानक जंग लगे झूलों पर रंग रोगन जिस ढंग से किया जा रहा है, उससे लग रहा है कि उद्घाटन के लिए केवल खानापूर्ति की जा रही है। नेचर पार्क को जैव विविधता का केंद्र बनना था, वहां लगाए गए पौधे देखरेख के अभाव में सूखने की कगार पर हैं। चिल्ड्रन गार्डन में घास-झाड़ियां उग आई हैं, झूले जंग खाकर बेकार हो चुके हैं और बच्चों के खेलने लायक कोई सुरक्षित व्यवस्था शेष नहीं है। इंट्रेंस गेट सहित कई निर्माण कार्य आज भी अधूरे और जर्जर अवस्था में पड़े हैं। नगरवासियों ने वन विभाग के अधिकारियों पर निर्माण के नाम पर शासकीय राशि के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत है। यदि निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच हो जाएं तो पूरी गड़बड़ी सामने आ सकती है।


करप्शन की डेंटिंग पेंटिंग
पार्क में ओपन जिम के नाम पर लगे उपकरण लगभग जंग खा चुके है। बच्चों के झूले इतने जर्जर हैं कि उन पर खेलना दुर्घटना को न्योता देना है। पैदल चलने के लिए बनाए गए फुटपाथ जगह-जगह से उखड़ चुके हैं। टाइल्स और पत्थर गायब हैं। इसके बावजूद नई संरचना या गुणवत्तापूर्ण मरम्मत करने के बजाय सिर्फ पुरानी कुर्सियों, गेट और ढांचों पर रंग-रोगन कर उन्हें नया दिखाने की कोशिश की जा रही है।


कागजों पर लहलहा रहा है पार्क
नेचर पार्क में ओपन जिम, योगा सेंटर, तालाब और अन्य प्रमुख कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं, जबकि इन सभी मदों की पूरी राशि पहले ही आहरित की जा चुकी है। पार्क के भीतर बनाए गए पाथवे में केवल मुरुम डालकर औपचारिकता निभा दी गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया है, लेकिन वास्तविक गुणवत्ता और उपयोगिता की अनदेखी की गई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शुरू से ही घटिया सामग्री और लापरवाह निर्माण के कारण पार्क उद्घाटन से पहले ही पुराना और क्षतिग्रस्त नजर आने लगा है। अब यहां किसी भी प्रकार की नवीनता या आकर्षण शेष नहीं बचा है। ऐसे जर्जर पार्क का उद्घाटन करना नगरवासियों की भावनाओं और टैक्स के पैसों के साथ सीधा छलावा होगा।
नगरवासियों के सवाल
नेचर पार्क के कार्यों को लेकर नगर में आक्रोश का माहौल है और सवाल सीधे-सीधे वन विभाग से पूछे जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, तो नेचर पार्क आज तक उपयोग योग्य क्यों नहीं है? अधूरे और घटिया निर्माण की जिम्मेदारी किस अधिकारी और ठेकेदार की है? क्या सिर्फ दिखावटी रंग-रोगन कर उद्घाटन कर पूरे मामले पर पर्दा डालने की तैयारी है?









