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शिक्षा के गिरते स्तर पर शिक्षक की चिंता: सुधार के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी — रामचंद्र सोनवंशी

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कोंडागांव:
देश में शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर एक शिक्षक की पीड़ा और चिंतन सामने आई है। स्कूल शिक्षक रामचंद्र सोनवंशी ने कहा है कि शिक्षा की गुणवत्ता में आई गिरावट के लिए किसी एक व्यक्ति या संस्था को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि यह एक बहुआयामी समस्या है, जिसमें सरकार, शिक्षा नीतियां, शिक्षक, अभिभावक, छात्र और समाज—सभी की साझा जिम्मेदारी बनती है।
उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि शिक्षा नीति में स्पष्टता और निरंतरता का अभाव, सीमित बजट, कमजोर प्रशासन, स्कूलों में संसाधनों की कमी, योग्य शिक्षकों का अभाव और शिक्षण पद्धतियों में नवाचार की कमी जैसी समस्याएं शिक्षा को प्रभावित कर रही हैं। इसके साथ ही छात्रों में रटने की प्रवृत्ति, व्यावहारिक ज्ञान की कमी और अभिभावकों की शिक्षा के प्रति उदासीनता भी चिंता का विषय है। समाज में नैतिक मूल्यों के क्षरण और शिक्षा के प्रति घटते सम्मान को भी उन्होंने गिरते शैक्षिक स्तर का एक कारण बताया।
रामचंद्र सोनवंशी ने विशेष रूप से शिक्षकों की वर्तमान स्थिति पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि आज शिक्षक पढ़ाने से अधिक प्रशासनिक कार्यों, रिपोर्ट, फॉर्म और डाटा अपलोड जैसे दायित्वों में उलझे हुए हैं। तकनीक के अत्यधिक और अनियोजित उपयोग, कार्यक्रमों और औपचारिक गतिविधियों के दबाव तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित स्टाफ के कारण शिक्षकों पर कार्यभार लगातार बढ़ रहा है। इससे उनके मानसिक तनाव और आत्मसम्मान पर भी असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य ‘मानव निर्माण’ है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में यह लक्ष्य कहीं न कहीं पीछे छूटता जा रहा है। शिक्षक-छात्र के बीच भावनात्मक जुड़ाव कमजोर हो रहा है और शिक्षा अधिकतर आंकड़ों, समय-सीमा और प्रदर्शन तक सीमित होती जा रही है।
अपने सुझावों में उन्होंने शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम में सुधार, आधुनिक व तकनीकी शिक्षण पद्धतियों के संतुलित उपयोग और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही यह भी कहा कि शिक्षा में सुधार एक सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए शिक्षकों को स्वतंत्रता, सम्मान और विश्वास देना आवश्यक है।
रामचंद्र सोनवंशी का मानना है कि यदि शिक्षक व्यवस्था से धीरे-धीरे दूर होते गए, तो स्कूल की इमारतें तो रहेंगी, लेकिन शिक्षा की आत्मा कमजोर हो जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से मिलकर शिक्षा को मजबूत और प्रभावी बनाने की अपील की ।

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