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दीपका खदान में ब्लास्टिंग की वजह से बेकसूर राह चलते आदमी की मौत

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दीपका  संवाददाता – हेमचंद सोनी
गांव के नजदीक सुरक्षा को ताक में रखकर की जा रही है ब्लास्टिंग सुरक्षा अधिकारी सो रहे हैं गहरी नींद में
हैवी ब्लास्टिंग से राह चलते ग्रामीण की मौत को लेकर लोगों का फूटा का गुस्सा जिम्मेदार अधिकारियों पर एफ आई आर की मांग
​भूस्थापित नेताओं ने की 50 लाख मुआवजा और स्थायी नौकरी की मांग
गेवरा दीपका
एसईसीएल की मेगा प्रोजेक्ट दीपका खदान में ब्लास्टिंग की वजह से एक और निर्दोष राह चलते ग्रामीण ने दम तोड़ दिया
बुधवार की दोपहर को एसईसीएल दीपका परियोजना अंतर्गत सुवाभोंडी फेस कोयला खदान में प्रबंधन और सुरक्षा अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण एक हृदयविदारक घटना घटित हुई खदान में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर की जा रही हैवी ब्लास्टिंग के कारण सड़क पर चल रहे ग्रामीण लखन पटेल के ऊपर पत्थर छिटककर आ गिरा जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई बताया जा रहा है कि लखन लाल पटेल किसी काम से रिकी से अपने घर की ओर जा रहे थे इसी दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ताक में रखकर प्रतिदिन की तरह घटना हैवी ब्लास्टिंग की जा रही थी जिसकी वजह से ग्रामीण लखन लाल पटेल को मौत का सामना करना पड़ा
​इस घटना को लेकर भू स्थापित नेताओं ने एसईसीएल प्रबंधन और खान सुरक्षा निदेशालय (DGMS) को आड़े हाथों लिया है मृतक के परिवार को 50 लख रुपए का मुआवजा और स्थाई नौकरी देने की मांग की है
पहले भी हो चुकी है कई बार ऐसी घटनाएं डीजीएमएस टीम का दौरा सिर्फ खानापूर्ति
बेकसूर ग्रामीण बार-बार हादसे का शिकार हो रहे हैं और घटना घटित होने के बाद खदानों की सुरक्षा को लेकर डीएमएस का दौरा निरंतर लगा रहता है इसके बावजूद सुरक्षा केवल टेबल तक सीमित हो जा रहा है और और खदानों में ब्लास्टिंग के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों (SOP) का पालन नहीं किया जा रहा है रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक सड़कों के इतने करीब बिना उचित घेराबंदी और सुरक्षा चेतावनी के हैवी ब्लास्टिंग करना सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है
जिम्मेदार अधिकारियों पर हो एफ आई आर दर्ज
खदानों में हैवी ब्लास्टिंग को लेकर आसपास के ग्रामीण अपनी पुस्तक जमीन को देख देने के बावजूद सुविधा से वंचित हो चुके हैं और एसईसीएल प्रबंधन को आंदोलन करते हुए कई बार चेतावनी भी दे चुके हैं लेकिन प्रबंधन इसे गंभीरता से नहीं लेने के कारण ग्रामीणों को इसकी कीमत अपनी जान से चुकानी पड़ रही है उपस्थित ग्रामीणों का कहना है कि
खान सुरक्षा निदेशालय (DGMS) और एसईसीएल के संबंधित लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्यवाही और एफआईआर दर्ज की जाए

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