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कवर्धा धान घोटाला: 7 करोड़ के धान को चूहे-दीमक ने खा लिया? गृह मंत्री के गृह जिले में बड़ा खुलासा

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रघुराज/कवर्धा। छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा के गृह जिला कवर्धा में 7 करोड़ रुपये मूल्य का धान संग्रहण केंद्र से गायब होने का मामला तूल पकड़ रहा है। सरकारी गोदामों से हजारों क्विंटल धान के लापता होने की शिकायत पर अधिकारियों से पूछताछ करने गए लोगों को चौंकाने वाला जवाब मिला – “धान गायब नहीं हुआ, चूहे और दीमक ने खा लिया!” यह बयान सुनकर किसानों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।

कवर्धा जिले के विभिन्न धान संग्रहण केंद्रों पर पिछले कुछ महीनों से अनियमितताओं की शिकायतें आ रही थीं। सूबे के सबसे बड़े धान उत्पादक जिले में किसानों द्वारा उपार्जित धान के स्टॉक में भारी अंतर पाया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 7 करोड़ रुपये का धान गायब था। जब इस संबंध में नायब तहसीलदार, कोटवार और अन्य अधिकारियों से सवाल किया गया तो उनका एक ही तर्क था – “चूहे और दीमक ने धान खा लिया।” एक अधिकारी ने कहा, “यहाँ के चूहे बहुत बड़े हैं, वे पूरा बोरा ही खा जाते हैं।”

स्थानीय किसान संगठनों ने इसे घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया। किसान नेता रमेश साहू ने कहा, “हम दिन-रात खेतों में मेहनत करते हैं। सरकार MSP पर धान बेचने का वादा करती है, लेकिन गोदामों से ही धान गायब हो जाता है। चूहे-दीमक को 7 करोड़ का धान खाने दो, हमारा क्या होगा?” एक अन्य किसान ने व्यंग्य किया, “कवर्धा के चूहे तो सुपरमैन हो गए। इतना धान खाते हैं, फिर भी मोटे नहीं दिखते।”

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि कवर्धा छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा का गृह जिला है। विपक्ष ने तीखा प्रहार किया है। कांग्रेस नेता ने कहा, “गृह मंत्री का जिला है, फिर भी गोदामों में चूहे राज कर रहे हैं। क्या पुलिस इसकी जांच करेगी?” BJP ने इसे पुरानी सरकार का घपला बताने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय स्तर पर BJP नेताओं पर भी उंगलियां उठ रही हैं।

धान संग्रहण केंद्रों का दौरा करने पर स्थिति और दयनीय मिली। टूटे-फूटे ताले, जर्जर दीवारें, जालीदार खिड़कियां – चूहों के लिए स्वर्ग। कर्मचारियों की संख्या न्यूनतम, रिकॉर्ड बुक गायब। एक गोदाम में तो दरवाजा ही टूटा पड़ा था। CCTV कैमरे नाममात्र के। किसानों का आरोप है कि रात के अंधेरे में ट्रकों में धान लादकर ले जाया जाता है। मार्कफेड के अधिकारियों पर भी मिलीभगत के आरोप लगे।

कवर्धा के सांसद और विधायक तक इस मामले पर चुप हैं। किसान संगठनों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। धान किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और हमारा भुगतान नहीं किया गया तो बड़े आंदोलन की तैयारी है। भूपेश सरकार के समय से चला आ रहा यह सिलसिला नई सरकार में भी जारी है। विपक्ष ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने का ऐलान किया है।

कृषि विभाग ने जांच के आदेश जारी किए हैं, लेकिन स्थानीय लोग शक जताते हैं। चूहे-दीमक घोटाले ने न केवल किसानों का भरोसा तोड़ा है, बल्कि छत्तीसगढ़ के धान बेल्ट की साख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या गृह मंत्री अपने जिले के चूहों पर अंकुश लगाएंगे या यह घोटाला दब जाएगा? कवर्धा के किसान जवाब मांग रहे हैं।

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