रतनपुर संवाददाता – विमल सोनी
सिद्ध मुनि कका पहाड़ मे धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सामुदायिक उल्लास का संगम देखने को मिला जिसमें हर जगह मेले जैसी रौनक सजी रही ।
मकर संक्रांति के पावन पर्व पर धार्मिक उल्लास से सराबोर दिखाई दिया. ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया, जिसके साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों सिद्धबाबा कका पहाड़,बैराग वन, थानापारा मंदिर और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख मंदिरों में मेले जैसा माहौल रहा. पूजा, स्नान और दान का पुण्य प्राप्त करने श्रद्धालुओं का तांता सुबह से ही लगा रहा.

रतनपुर स्तिथ कका पहाड़ मे उमड़ा श्रधांलुओं की भीड़
मकर संक्रांति 2026 आस्था, दान, सूर्य उपासना और लोक संस्कृति के रंगीन मेल के साथ उत्साहपूर्वक मनाई गई, जिसमें धार्मिक परंपराओं और सामुदायिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला।
पवित्र स्नान: हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई, जिसे माघ मेले का पहला प्रमुख स्नान बताया गया।
सूर्य और शनि की पूजा: सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ यह पर्व मनाया गया, जिसमें सूर्य और शनि देव को प्रसन्न करने के लिए काले तिल, गुड़ और काली उड़द दाल की खिचड़ी का दान किया गया।
दान-पुण्य का महत्व: इस दिन गरीबों को भोजन, गर्म कपड़े (कंबल), अनाज और तिल जैसी वस्तुएं दान करने से पुण्य मिलता है, जिससे ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
रंगों का महत्व: मकर संक्रांति पर काले वस्त्र पहनने की परंपरा है, जो शनिदेव से जुड़ा है, हालांकि कुछ लोग सूर्य और शुभता के लिए लाल या सफेद रंग भी चुनते हैं।
पतंगबाजी और सांस्कृतिक उत्सव: सभी शहर सहित कई गाँवो में रंग-बिरंगी पतंगों से आसमान सजा, और पारंपरिक वेशभूषा (घाघरा-चोली, केडियू) में लोग झूम उठे।
खिचड़ी का भोग: सूर्यदेव को भोग लगाने और काली उड़द दाल और चावल की खिचड़ी बनाने का प्रचलन है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व है।









