पोडियामी दीपक/ सुकमा –
जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर, घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के बीच बसे कुड़ेद गाँव में जब मानसून की पहली फुहार पड़ती थी, तो उईका नंदा का परिवार खुश होने के बजाय सहम जाता था। मिट्टी की कच्ची दीवारें और दरकती खपरैल की छत उनके लिए ‘घर’ कम, असुरक्षा का साया ज्यादा थी। लेकिन आज कहानी बदल चुकी है। ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गाँव) योजना की छांव में उईका नंदा का अपना पक्का मकान बनाने का सपना सच हो गया है, जिसे उन्होंने आर्थिक समस्या के कारण धूल में कहीं दफन कर दिया था।

बरसाती डर से आत्मसम्मान तक का सफर
उईका नंदा के लिए पक्का मकान महज एक ईंट-गारे का ढांचा नहीं है। वे बताते हैं, “सालों तक हम टपकती छत के नीचे रातें गुजारते थे। मुख्यालय से इतनी दूरी थी कि लगता था हम तक मदद कभी नहीं पहुंचेगी। खुद के पैसों से पक्का घर बनाना मेरे लिए नामुमकिन था।” लेकिन जब प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत प्रशासनिक टीम सर्वे के लिए उनके दरवाजे तक पहुँची, तो उईका को पहली बार एहसास हुआ कि सरकार सिर्फ फाइलों में नहीं, उनके साथ खड़ी है।
दुर्गम रास्ते भी नहीं रोक पाए विकास की रफ़्तार
सुकमा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में निर्माण सामग्री पहुँचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि दूरी, काम की गुणवत्ता में बाधा न बने। पारदर्शी तरीके से किश्तें सीधे बैंक खाते में आईं और उईका नंदा ने अपनी निगरानी में अपने भविष्य की नींव रखी।
पीएम आवास योजना से लाभान्वित हितग्राही
श्री उइका नंदा ने बताया कि जिला मुख्यालय से इतनी दूर होने के बाद भी हमें कभी नहीं लगा कि हम शासन की पहुंच से दूर हैं। मेरा पीएम आवास योजना के तहत पक्का घर बन गया है अब न धूप का डर है, न बारिश का। यह घर सिर्फ मेरे रहने की जगह नहीं, मेरे बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नींव है।









