त्याग_ तपस्या के प्रतिमूर्ति हैं प्रभु श्रीराम …पंडित विजय कौशल
सामाजिक सद्भाव और समरसता का प्रतीक पर्व है श्रीराम कथा… अधिवक्ता चितरंजय
आज हर व्यक्ति देश भक्ति की बात करता है और उम्मीद करता है कि अब भी समाज में चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह जैसे वीर शहीद जन्म लें, पर ये बलिदानी खुद के घर नहीं बल्कि दूसरे घर में पैदा हों, यह बात पंडित विजय कौशल महाराज ने श्रीराम कथा मंच से कहते हुए बाल वीर साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह के द्वारा राष्ट्र और धर्म के लिए किए गए बलिदान का स्मरण किया। उन्होंने प्रभु श्रीराम के राज तिलक का त्याग कर वन गमन की कथा में प्रभु श्रीराम को त्याग_तपस्या की प्रतिमूर्ति बताते हुए कथा के दरमियान बाल वीरों के हंसते हुए जिंदा दीवार में चुन जाने की गाथा सुनाते हुए कहा कि आज राष्ट्र को सशक्त बनाने अपने भावी पीढ़ी को इन वीर शहीदों के बलिदान का बोध कराना होगा ताकि उनमें राष्ट्र प्रथम का भाव जागृत हो और अखंड भारत के साथ विश्व गुरु भारत की कल्पना साकार हो।

आज कथा के पंचम दिवस पर पंडित विजय कौशल की कथा श्रवण करने हजारों की संख्या में हाजिर श्रद्धालुओं से कथा पंडाल भरा हुआ था। जहां कथा की शुरुवात में मुख्य यजमान नगर विधायक अमर अग्रवाल के साथ समाज प्रमुखों ने व्यास पीठ पर आसीन श्रद्धेय पंडित विजय कौशल जी का पुष्प गुच्छ भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया तो वहीं आयोजन समिति की ओर से विधायक अमर अग्रवाल ने समाज प्रमुखों का श्रीराम अंगवस्त्रम भेंटकर अभिनंदन किया।
इस अवसर पर अघरिया समाज की ओर से उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल के साथ बंशीधर पटेल, केशव प्रसाद पटेल, डोरी लाल पटेल आदि वरिष्ठजनों ने व्यास पीठ से आर्शीवाद प्राप्त कर कथा श्रवण किया तथा इस सफल धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक सद्भाव व समरसता की परंपरा को कायम रखने वाले विधायक अमर अग्रवाल के प्रति साधुवाद प्रगट किया।









