-विकासखंड जगदलपुर में बिखरी लोक-संस्कृति की छटा =
-भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव हुए शामिल =
अर्जुन झा/जगदलपुर । बस्तर अंचल की आदिम संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और रीति-रिवाजों को वैश्विक पटल पर लाने के उद्देश्य से जिले के अलग-अलग विकासखंडों में ‘बस्तर पंडुम’ का भव्य आयोजन किया गया। जगदलपुर विकासखंड स्तरीय कार्यक्रम आसना के बादल अकादमी में हुआ। इस उत्सव में जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने बस्तर की विरासत को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव ने भावुक अपील की। उन्होंने कहा- बस्तर की संस्कृति और परंपराओं को बनाने में हमारे पूर्वजों की कई पीढ़ियां लगी हैं। उन्होंने न केवल रीतियों को, बल्कि यहां के प्राकृतिक संसाधनों को भी संरक्षित किया। श्री देव ने कहा हमारी संस्कृति हमारी पहचान है हमें हमारी संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। किरण देव ने कहा कि आज बस्तर पंडुम के माध्यम से हमारे खान-पान और रीति-रिवाज दुनिया के सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने हमें एक ऐसा मंच दिया है, जिससे हमारी पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल रहा है। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपनी नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली संस्कृति और विरासत से अवगत कराएं। हमारे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी को बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए बधाई एवं साधुवाद। विधायक श्री देव ने बस्तर की विविधता को रेखांकित करते हुए कहा कि यहां हर 10 किलोमीटर पर बोली, भाषा, रहन-सहन, सभ्यता, पहनावा और संस्कृति बदल जाती है। उन्होंने कहा- पूरे विश्व की नजर आज बस्तर पर है।

श्री देव ने नक्सलवाद के खात्मे और विकास कार्यों में तेजी की बात करते हुए कहा, अब बस्तर का आदिवासी जंगल में जाने से नहीं डरता। हम तेजी से देवगुड़ियों का निर्माण कर रहे हैं। हमें हिंदी और अंग्रेजी जरूर सीखनी चाहिए, लेकिन अपनी स्थानीय बोली और भाषा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। बस्तर की हर वनस्पति औषधीय गुणों से भरपूर है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए।अतिथियों का स्वागत परंपरागत रूप से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ देवी-देवताओं के आह्वान के साथ किया गया। पारंपरिक बाजा मोहरी की धुन पर देवी देवताओं का आह्वान किया गया। आदिवासी संस्कृति और परंपरा का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने छत्तीसगढ़ के बस्तर की सोंधी मिट्टी की महक से रूबरू करा दिया। कार्यक्रम की शुरुआत आस्था और विश्वास के प्रतीक माई दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना से हुई। जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
था स्वाद का खजाना भी
आयोजन का आकर्षण केवल नृत्य और संगीत तक सीमित नहीं था, बल्कि बस्तर के जंगलों का दुर्लभ स्वाद भी यहां प्रमुखता से छाया रहा। खान-पान के शौकीनों के लिए यह आयोजन किसी दावत से कम नहीं था। यहां बस्तर के वनों में पाए जाने वाले दुर्लभ कंद-मूलों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई, जिसमें कोचई, तरगारिया, डेंस, कलमल, पीता, सोरेंदा, जिमी और नागर कांदा शामिल थे। इन कंदों ने जहां लोगों को प्रकृति के उपहारों से परिचित कराया, वहीं पारंपरिक व्यंजनों ने भी खूब वाहवाही बटोरी। जोंधरी लाई के लड्डू की मिठास और जोंधरा, मंडिया व पान बोबो जैसे पारंपरिक पकवानों का स्वाद चखकर लोग अभिभूत हो गए। गुड़ बोबो की मिठास के साथ तीखुर बर्फी और भेंडा चटनी ने भोजन प्रेमियों को एक अविस्मरणीय जायका प्रदान किया। इस दौरान राजाराम तोडे़म एवं अरविंद नेताम ने बस्तर पंडुम के संबंध में अपनी बात रखी। इस दौरान बेवरेज अध्यक्ष श्रीनिवास राव, जिला भाजपा अध्यक्ष वेदप्रकाश पांडे, जनपद पंचायत अध्यक्ष पदलाम नाग, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम, पूर्व विधायक राजाराम तोडे़म, दशरथ कश्यप, पुरुषोत्तम कश्यप, जनपद पंचायत सदस्य, संरपंच एवं समाज प्रमुखों के अलावा एसडीएम ऋषिकेश तिवारी, जनपद पंचायत सीईओ अमित भाटिया व काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।









