रामचंद्र सोनवंशी ने विशेष रूप से शिक्षकों की वर्तमान स्थिति पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि आज शिक्षक पढ़ाने से अधिक प्रशासनिक कार्यों, रिपोर्ट, फॉर्म और डाटा अपलोड जैसे दायित्वों में उलझे हुए हैं। तकनीक के अत्यधिक और अनियोजित उपयोग, कार्यक्रमों और औपचारिक गतिविधियों के दबाव तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित स्टाफ के कारण शिक्षकों पर कार्यभार लगातार बढ़ रहा है। इससे उनके मानसिक तनाव और आत्मसम्मान पर भी असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य ‘मानव निर्माण’ है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में यह लक्ष्य कहीं न कहीं पीछे छूटता जा रहा है। शिक्षक-छात्र के बीच भावनात्मक जुड़ाव कमजोर हो रहा है और शिक्षा अधिकतर आंकड़ों, समय-सीमा और प्रदर्शन तक सीमित होती जा रही है।
अपने सुझावों में उन्होंने शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम में सुधार, आधुनिक व तकनीकी शिक्षण पद्धतियों के संतुलित उपयोग और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही यह भी कहा कि शिक्षा में सुधार एक सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए शिक्षकों को स्वतंत्रता, सम्मान और विश्वास देना आवश्यक है।
रामचंद्र सोनवंशी का मानना है कि यदि शिक्षक व्यवस्था से धीरे-धीरे दूर होते गए, तो स्कूल की इमारतें तो रहेंगी, लेकिन शिक्षा की आत्मा कमजोर हो जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से मिलकर शिक्षा को मजबूत और प्रभावी बनाने की अपील की ।
मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन (योग, ध्यान), सामाजिक जुड़ाव और शौक पूरे करने जैसी जीवनशैली में बदलाव करें; स्क्रीन टाइम कम करें; अपनी भावनाओं को व्यक्त करें; और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लेने से न हिचकिचाएं, क्योंकि ये छोटे-छोटे कदम बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
जीवनशैली में बदलाव
नियमित व्यायाम: हर दिन 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि एंडोर्फिन (खुशी के हार्मोन) जारी करती है और तनाव कम करती है। दौड़ना, योग, या साइकिल चलाना फायदेमंद है।
पौष्टिक आहार: फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन खाएं। प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा चीनी से बचें।
पर्याप्त नींद: हर रात 7-9 घंटे की गुणवत्ता वाली नींद लें। सोने से पहले स्क्रीन (मोबाइल, टीवी) से बचें।
तनाव प्रबंधन: गहरी सांस लेना, ध्यान, या माइंडफुलनेस जैसी तकनीकें अपनाएं।
शौक और आराम: अपनी पसंद की गतिविधियों (बागवानी, पढ़ना, संगीत) के लिए समय निकालें।
मानसिक आदतें
सामाजिक रूप से जुड़ें: दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं, टेक्स्टिंग के बजाय आमने-सामने बात करें।
माइंडफुलनेस: वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करें, अतीत की चिंता और भविष्य के डर से बचें।
कृतज्ञता: उन चीजों के लिए आभारी रहें जो आपके पास हैं।
आत्म-करुणा: अपने साथ वैसे ही दयालु रहें जैसे आप किसी दोस्त के साथ होते हैं।
यथार्थवादी लक्ष्य: छोटे, प्राप्त करने योग्य लक्ष्य निर्धारित करें।
कब लें पेशेवर मदद
यदि आप लगातार उदासी, चिंता या अन्य मानसिक स्वास्थ्य लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो किसी मनोचिकित्सक (Psychiatrist) या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। थेरेपी और दवाएं बहुत प्रभावी हो सकती हैं।
याद रखें, अपने मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करना एक मूल्यवान संपत्ति है, और इसमें निवेश करना आपके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है।









