रघुराज/रायपुर, 19 जनवरी 2026:
राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में डिजिटल अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को डराने-धमकाने और भ्रमित कर करोड़ों की ठगी को अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला रायपुर के विधानसभा थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक 74 वर्षीय रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर को साइबर ठगों ने करीब 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 1 करोड़ 28 लाख रुपये की ठगी कर ली।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वर्णभूमि कॉलोनी निवासी स्वप्न कुमार सेन के पास कुछ दिन पहले एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। ठग ने दावा किया कि स्वप्न कुमार सेन के नाम से मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला और अन्य गंभीर अपराधों में एफआईआर दर्ज है। उनके बैंक खातों की जांच चल रही है और किसी भी समय गिरफ्तारी हो सकती है। डराने के लिए ठग ने व्हाट्सएप पर फर्जी कोर्ट ऑर्डर, पुलिस वर्दी में वीडियो कॉल और आधिकारिक दस्तावेज दिखाए।
पीड़ित ने बताया, “मैं डर गया था। ठगों ने कहा कि जांच पूरी होने तक घर से बाहर न निकलें, वरना गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा। उन्होंने 10 दिनों तक मुझे वीडियो कॉल पर रखा और पैसे ट्रांसफर करने को कहा। पहले छोटी रकम, फिर लाखों। कुल 1.28 करोड़ रुपये उनके बताए खातों में भेज दिए।” ठगों ने पैसे वापस करने का लालच भी दिया, लेकिन अंत में फोन काट दिया।
विधानसभा थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साइबर सेल को सूचित किया गया है। यह स्कैम पूरे देश में फैल रहा है, जहां ठग पुलिस या बैंक अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का ड्रामा रचते हैं। छत्तीसगढ़ में पिछले एक माह में 50 से अधिक ऐसे मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 5 करोड़ से ज्यादा की ठगी हुई। बिलासपुर, दुर्ग और रायपुर में सबसे ज्यादा शिकार बुजुर्ग और महिलाएं हो रही हैं।
पुलिस ने चेतावनी जारी की है: कोई भी सरकारी अधिकारी फोन पर पैसे मांगता है या डिजिटल अरेस्ट का दावा करता है, तो यह ठगी है। हमेशा थाने जाकर जांच करें। साइबर विशेषज्ञ डॉ. राहुल वर्मा ने कहा, “ऐप्स डाउनलोड करने या लिंक पर क्लिक न करें। स्क्रीन शेयरिंग से बचें। संदिग्ध कॉल पर 1930 हेल्पलाइन या साइबर सेल से संपर्क करें।”
जागरूकता के लिए पुलिस सोशल मीडिया पर वीडियो अभियान चला रही है। नागरिकों से अपील है कि परिवार के बुजुर्गों को सतर्क करें। साइबर क्राइम रोकने के लिए डिजिटल साक्षरता जरूरी है।







