Home चर्चा में दलपत दीपोत्सव को स्वच्छता का जनांदोलन बना दिया महापौर संजय पाण्डेय ने

दलपत दीपोत्सव को स्वच्छता का जनांदोलन बना दिया महापौर संजय पाण्डेय ने

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= कर्मनिष्ठा, सजगता और संवेदनशीलता की मिसाल बन गए युवा नेता संजय =
= स्वच्छता की अनूठी अलख जाग उठी शहर में =
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता का जो संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले ही कार्यकाल में दिया था, उस संदेश को संजय पाण्डेय ने तभी आत्मसात कर लिया था, जब वे एक आम नागरिक थे। आज संजय पाण्डेय जगदलपुर के महापौर हैं। महापौर पद के चुनाव के दौरान संजय पाण्डेय ने शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने का जो वादा किया था, उस पर वे सौ फीसदी खरे उतर रहे हैं। आज संजय पाण्डेय ने दलपत दीपोत्सव को स्वच्छता का जनांदोलन बना दिया है। उनकी आवाज पूरे शहर में गूंजने लगी है और शहर की प्राचीन धरोहर को संवारने एवं संरक्षित करने के लिए हजारों हाथ उठ खड़े हो गए हैं।


जगदलपुर नगर का दलपत सागर ऐतिहासिक सरोवर है और यह जगदलपुर की शान भी है। वैसे तो दलपत दीपोत्सव का आयोजन पिछले कई सालों से होता आ रहा है, मगर दलपत सागर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने की जो पहल महापौर संजय पाण्डेय ने की है, उसका कोई मुकाबला अब देखने को नहीं मिला है। शहर की धरोहरों के साथ ही सड़कों और गलियों को भी साफ सुथरा बनाए रखने की दिशा में संजय पाण्डेय ने शानदार और सराहनीय कदम बढ़ाए हैं। स्वच्छता के प्रति नागरिकों में जबरदस्त जागरूकता आई है। संजय पाण्डेय समय समय पर हाथों में झाड़ू लेकर सड़कों और गलियों में निकल पड़ते हैं, घरों और दुकानों में जाकर समझाईश देते हैं कि सूखा और गीला कचरा अलग अलग डस्टबिन में रखें, सड़कों व गलियों में कचरा न फेंके, गंदगी न फैलाएं। स्वाभाविक है, जब शहर का प्रथम नागरिक जब ऎसी प्रेरणा देने गली गली घूमेगा तो शहर के आम नागरिक जागरूक होंगे ही। हमारी प्राचीन धरोहर दलपत सागर को गंदगी, गाद, जलकुंभियों और मलबे ने निगल लिया था, उस दलपत सागर की आभा अब पुनः दमकती दिखाई पड़ने लगी है। यह मेयर संजय पाण्डेय की कर्मनिष्ठा, सजगता संवेदनशीलता का ही सुफल है। दरअसल दलपत दीपोत्सव को महापौर संजय पाण्डेय स्वच्छता का महापर्व और स्वच्छता का जनांदोलन बना दिया है। इस जनांदोलन में शहर के जागरूक नागरिक, समाजसेवी एवं सामाजिक संगठन और अधिकारी कर्मचारी भी सहचर बन गए हैं। आज स्थिति ऎसी है कि हर कोई दलपत सागर को संवारने के यज्ञ में आहूति देने लालायित नजर आ रहा है। दलपत दीपोत्सव का भव्य आयोजन बसंत पंचमी के दिन 23 जनवरी को होना है, तब इस सरोवर में एकसाथ हजारों दीप जल उठेंगे, मगर उससे माह भर पहले से ही रोज संध्या बेला में 101 दीपों की रौशनी से दलपत सागर दमक उठता है। यह दमक निसंदेह महापौर संजय पाण्डेय की मेहनत और जन सहभागिता के दम पर आई है। दलपत दीपोत्सव कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर दो दिन पहले ही कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में बैठक हुई थी। बैठक में महापौर संजय पांडेय, नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन, कलेक्टर हरिस एस, नगर निगम आयुक्त प्रवीण वर्मा, एसडीएम ऋषिकेश तिवारी, एएसपी महेश्वर नाग सहित विभिन्न समाजों, व्यापारिक संगठन, स्वयंसेवी संगठन, परिवहन संघ के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में दलपत सागर को पूरी तरह स्वच्छ कर दलपत दीपोत्सव को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प व्यक्त किया। इस बैठक में महापौर संजय पांडेय ने कहा कि दीपोत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से नागरिकों को स्वच्छता से जोड़ना एक प्रभावी पहल है। महापौर श्री पांडेय ने नागरिकों से अपील kiकि शहर की साफ-सफाई केवल नगर निगम की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। दलपत सागर की स्वच्छता एवं गरिमा बनाए रखने में सभी समाजजन सक्रिय सहयोग करें, ताकि यह स्थल सांस्कृतिक आस्था के साथ-साथ स्वच्छता का भी प्रतीक बन सके। कलेक्टर हरिस एस. ने कहा कि प्रतिवर्ष की भांति भी इस वर्ष के दीपोत्सव में सभी समाज और व्यापारिक संगठनों का सहयोग मिल रहा है, यह ऐतिहासिक सरोवर को सहेजने के साथ ही स्वच्छता के प्रति सभी की सजग सहभागिता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने सभी लोगों से आग्रह करते हुए कहा कि दीपोत्सव कार्यक्रम में अधिक से अधिक पहुंचे और इसे भव्य उत्सव के रूप में मनाएं।


राष्ट्रप्रेम का संदेश भी
इस बार का दलपत दीपोत्सव स्वच्छता के साथ साथ राष्ट्रप्रेम का संदेश देने वाला भी साबित होगा पिछले चार वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहे इस दीपोत्सव में हर साल नागरिकों की बढ़ती सहभागिता ने इसे अब एक महापर्व का रूप दे दिया है। इस वर्ष के आयोजन को ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बनाने के लिए एक विशेष थीम निर्धारित की गई है, जो एक दीया स्वच्छता के नाम और एक दीया वंदे मातरम की 150 वीं वर्षगांठ के नाम होगा। स्वच्छता और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत नजारा 23 जनवरी की शाम जगदलपुर के दलपत सागर में देखने को मिलेगा। दलपत सागर की तटों पर एकसाथ दो लाख से भी ज्यादा दीपकों की आभा बिखरने वाली है।

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