बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
= सर्व आदिवासी समाज के नेताओं ने सांसद, विधायकों पर लगाए गंभीर आरोप =
जगदलपुर। आदिवासी विश्राम भवन जगदलपुर का निर्माण कार्य 5 वर्षसे अधूरा पड़े रहने के कारण आदिवासी समाज को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भवन का निर्माण नहीं होने से विभिन्न शासकीय व न्यायालयीन कार्यों के लिए जगदलपुर आने वाले आदिवासी समाज के लोगों को शहर में ठहरने की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस स्थिति को लेकर आदिवासी समाज में सरकार एवं प्रशासन के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ रही है। आदिवासी विश्राम भवन के अधूरे निर्माण को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है।

सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने बताया कि 13 नवंबर 2021 को तत्कालीन बस्तर कलेक्टर द्वारा भवन निर्माण स्थल पर डिस्मेंटल की कार्रवाई के लिए आदेश जारी किया गया था, जिसके चलते निर्माण कार्य पर रोक लग गई थी। इससे पहले अगस्त माह 2021 में तत्कालीन मंत्री कवासी लखमा द्वारा आदिवासी विश्राम भवन निर्माण की घोषणा की गई थी और इसके लिए 4 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। 9 अगस्त 2021 को भूमिपूजन कर निर्माण कार्य की शुरुआत भी की गई थी। प्रकाश ठाकुर ने आगे बताया कि इसके पश्चात बस्तर के आदिवासी नेता राजाराम तोड़ेम और दशरथ कश्यप द्वारा इस निर्माण कार्य को लेकर आपत्ति दर्ज कराते हुए बस्तर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। इस मामले की सुनवाई वर्ष 2022 में कलेक्टर न्यायालय में हुई, जहां सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले का निराकरण किया गया। इसके बाद डिस्मेंटल की कार्रवाई पूरी की गई और पुनः निर्माण कार्य शुरू किया गया। न्यायालय, कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी बस्तर द्वारा 22 सितंबर 2022 को आदेश पारित करते हुए आदिवासी विश्राम भवन निर्माण की अनुमति प्रदान की गई।आरोप है कि बस्तर के कुछ जिम्मेदार नेताओं द्वारा बार-बार विश्राम भवन का कार्य रुकवाया जा रहा है, जो आदिवासी समाज के साथ अन्याय है। प्रकाश ठाकुर ने आरोप लगाया कि बस्तर के सांसद एवं विधायक न तो वन अधिकार मान्यता कानून के अंतर्गत आदिवासियों को पट्टे दिलाने का कार्य कर रहे हैं और न ही पेसा कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करवा रहे हैं। इसके विपरीत बाहरी उद्योगपतियों और व्यापारियों को संरक्षण दिया जा रहा है। साथ ही आदिवासियों को सामुदायिक वन संसाधन दावा पत्र भी नहीं दिए जा रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आदिवासी हितों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही। सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग युवा प्रभाग के अध्यक्ष संतू मौर्य ने बताया कि आदिवासी विश्राम भवन जगदलपुर का निर्माण कार्य पिछले कई वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। दूर-दराज़ के गांवों से आने वाले आदिवासी समाज के लोगों को ठहरने, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से बस्तर दशहरा जैसे महत्वपूर्ण पर्व के दौरान देवी-देवताओं के साथ आने वाले सिरहा, पुजारी, मांझी, चालकी एवं समाज के अन्य लोगों के लिए यही विश्राम भवन ठहरने का प्रमुख स्थल होता है, लेकिन अधूरे भवन के कारण उन्हें समुचित सुविधा नहीं मिल पा रही है। प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मांग की गई है कि आदिवासी विश्राम भवन का निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण कराया जाए। अन्यथा सर्व आदिवासी समाज को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। समाज ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है।










