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कोरबा में मानवता की मिसाल: रेलवे पटरी से तीन घायल गौवंशों को कंधों पर उठाकर बचाया, युवाओं की साहसिक पहल

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कोरबा संवाददाता – योगेन्द्र राठौर 

कोरबा (छत्तीसगढ़)। रेलवे पटरी से तीन घायल गौवंशों की जान बचाकर ग्राम फरसवानी निवासी शिवम राठौर एवं निःस्वार्थ गौ सेवा संस्थान, छत्तीसगढ़ की टीम ने मानवता और गौसेवा की मिसाल पेश की

रेलवे पटरी पर तीन गौवंश गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़े होने की सूचना मिलते ही शिवम राठौर अपनी टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तीनों गौसेवकों ने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए घायल गौवंश को लगभग आधा किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर रेलवे पटरी से सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद तत्काल चिकित्सकीय उपचार कराया गया और किराये पर पिकअप वाहन बुलाकर तीनों गौवंशों को सुरक्षित गौशाला पहुंचाया गया।

इस मानवीय और साहसिक कार्य में जिन गौसेवकों ने अहम भूमिका निभाई, उनके नाम हैं— शिवम राठौर (ग्राम फरसवानी), ऋतुराज पटेल (रिवापार) और राकेश वैष्णव (ग्राम खरवानी), जिला कोरबा। तीनों ने मिलकर सेवा, समर्पण और टीमवर्क की मिसाल पेश की।

निःस्वार्थ सेवा का सतत उदाहरण

शिवम राठौर आसपास के क्षेत्रों में बीमार व घायल गौवंश का त्वरित उपचार कराकर निःस्वार्थ सेवा का उदाहरण लगातार प्रस्तुत कर रहे हैं। उनकी तत्परता और संवेदनशीलता के कारण अनेक निराश्रित गौवंशों को नया जीवन मिला है। वे अपने समर्पित साथियों के साथ मिलकर कई मामलों में गौतस्करों को कानून के शिकंजे में लाने में भी सहयोग कर चुके हैं, जिससे क्षेत्र में गौसंरक्षण को मजबूती मिली है।

मजबूत नेटवर्क, प्रभावी सेवा

शिवम राठौर की पहचान केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। विभिन्न जिलों के गौसेवकों के साथ उनका मजबूत नेटवर्क है, जिसके कारण गौसेवा और गौसंरक्षण से जुड़े कार्य अधिक प्रभावी ढंग से संपन्न हो रहे हैं।

युवा शक्ति का संदेश

युवा दिवस के अवसर पर शिवम राठौर जैसे समर्पित युवा यह संदेश देते हैं कि सच्ची युवा शक्ति वही है, जो समाज, धर्म और जीवों की रक्षा के लिए निरंतर कार्यरत रहे। उनकी सेवाभावना और साहस आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

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