कोरबा –
नगर निगम की संपत्ति पर खुलेआम अवैध कब्जा और प्रशासन की चुप्पी को उजागर करता एक गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, भानु साहू के नाम पर आवंटित मकान के सामने नगर निगम की लगभग तीन डिसमिल भूमि पर पिछले करीब 20 वर्षों से अवैध कब्जा कर कॉलोनी के भीतर दुकान का संचालन किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि यह अवैध दुकान न केवल नियमों की धज्जियां उड़ा रही है, बल्कि पूरी कॉलोनी के लिए सिरदर्द बन चुकी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि दुकान के कारण वहां दिन-रात असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भारी असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
कॉलोनीवासियों के अनुसार, यह जमीन नगर निगम की सार्वजनिक संपत्ति है, जिस पर किसी भी प्रकार का निजी निर्माण या व्यवसायिक गतिविधि पूरी तरह अवैध है। इसके बावजूद 20 वर्षों से अवैध कब्जा बना रहना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार मौखिक शिकायतों के बावजूद न तो नगर निगम ने कार्रवाई की और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने संज्ञान लिया, जिससे अवैध कब्जाधारियों के हौसले और बुलंद होते गए।
नागरिकों का कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे नगर निगम कार्यालय का घेराव, कलेक्टर से शिकायत और उच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगे। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रशासन की होगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या नगर निगम अपनी ही जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराएगा?
या फिर प्रभाव और लापरवाही के आगे नियम यूं ही कुचले जाते रहेंगे?
यह मामला न केवल अवैध कब्जे का है, बल्कि शहर में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक निष्क्रियता और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।









