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भारत बन सकता है दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था: डेविड रुबेनस्टीन का बड़ा अनुमान

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भारत लगातार तेज़ी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आने वाले वर्षों में इसकी वैश्विक भूमिका और मजबूत होने की संभावना है। मौजूदा आर्थिक रफ्तार को देखते हुए भारत जल्द ही जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। इस बीच अमेरिका और चीन अभी पहले और दूसरे स्थान पर बने हुए हैं।

20–30 साल में शीर्ष पर पहुंच सकता है भारत

प्रसिद्ध निवेश कंपनी Carlyle Group के सह-संस्थापक डेविड रुबेनस्टीन ने कहा है कि अगले 20 से 30 वर्षों में भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। उन्होंने यह बात स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान कही।

रुबेनस्टीन के अनुसार, भारत की जनसंख्या, आर्थिक सुधार और निवेश के बढ़ते अवसर इसे लंबी अवधि में सबसे आगे ले जा सकते हैं।

अमेरिका–भारत संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत

उन्होंने अमेरिका और भारत के रिश्तों को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग मजबूत बना हुआ है। रुबेनस्टीन के मुताबिक, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रवैया भारत के प्रति आमतौर पर सकारात्मक रहा है और भारत में एक करीबी सहयोगी को राजदूत बनाकर भेजा जाना इसी का संकेत है।

निवेश नीतियों पर दी अहम सलाह

डेविड रुबेनस्टीन ने भारतीय नीति निर्माताओं को सुझाव दिया कि प्राइवेट इक्विटी और प्राइवेट क्रेडिट को संकीर्ण नजरिये से न देखा जाए। उनका कहना है कि जब इन क्षेत्रों को खुलकर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, तो मजबूत पूंजी वाले भारतीय उद्यमी भी बड़ी भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने समझाया कि प्राइवेट इक्विटी का मतलब गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश से है, जबकि प्राइवेट क्रेडिट सीधे कर्ज उपलब्ध कराने से जुड़ा होता है। Carlyle Group अब तक भारत में अलग-अलग सेक्टरों में लगभग 8 अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर चुका है।

चीन और वैश्विक राजनीति पर भी रखी राय

रुबेनस्टीन ने कहा कि अमेरिका की चीन नीति का उद्देश्य नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि व्यापार असंतुलन को संतुलित करना रहा है। उनके अनुसार चीन ने दूसरे वैश्विक बाजारों में अपनी बिक्री बढ़ाकर बड़े व्यापार अधिशेष हासिल किए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के लिए चीन से ज्यादा गंभीर मुद्दा रूस-यूक्रेन संघर्ष है। साथ ही यह संभावना भी जताई कि आने वाले समय में अमेरिका और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत हो सकती है।

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