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कर्तव्य पथ पर गरजेगी आत्मनिर्भर भारत की सैन्य ताकत, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ बनेगा आकर्षण

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77वें गणतंत्र दिवस समारोह से पहले सेना ने परेड और बीटिंग रिट्रीट को लेकर अहम जानकारियां साझा कीं. आर्मी परेड ब्रीफ में मेजर जनरल नवराज ढिल्लन ने बताया कि इस साल गणतंत्र दिवस परेड करीब 90 मिनट की होगी. परेड की शुरुआत रायसीना हिल्स से होगी, जो कर्तव्य पथ होते हुए लाल किला तक जाएगी. गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर एक झांकी में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के 88 घंटों की पूरी कार्रवाई की झलक देखने को मिलेगी. भारतीय सशस्त्र सेना की ये झांकी भारत की बदलती हुई सैन्य रणनीति और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का भी प्रतीक है. इससे पहले प्रधानमंत्री नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. परेड की शुरुआत राष्ट्रगान और 21 तोपों की सलामी से होगी.

77वें गणतंत्र दिवस समारोह से पहले सेना ने परेड और बीटिंग रिट्रीट को लेकर अहम जानकारियां साझा कीं. परेड की शुरुआत रायसीना हिल्स से होगी, जो कर्तव्य पथ होते हुए लाल किला तक जाएगी.

ऑपरेशन सिंदूर ने आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती ताकत और विकसित भारत 2047 की दिशा में राष्ट्र की अडिग प्रगति को प्रतिबिंबित किया. इस बार परेड में कई खास बातें देखने को मिलेंगी. यूरोपीय संघ (EU) का मार्चिंग दस्ता भी परेड का हिस्सा होगा. भारतीय सेना के दस्ते बैटल ऐरा से होते हुए ऑफेंसिव फॉर्मेशन का प्रदर्शन करेंगे, इस बार युद्ध के दौरान सेना की रणनीति को दिखाया जाएगा. इसके बाद बीटिंग रिट्रीट समारोह 29 जनवरी को आयोजित किया जाएगा, जिसमें आर्मी, आईटीबीपी, सीआरपीएफ और बीएसएफ के बैंड भारतीय धुनों की प्रस्तुति देंगे.

परेड में सेना के सभी प्रमुख युद्धक दस्ते शामिल होंगे. इनमें ड्रोन यूनिट, लोइटरिंग म्यूनिशन यूनिट, सिग्नल यूनिट और लॉजिस्टिक्स दस्ता शामिल हैं. इसके अलावा ऑल टेरेन व्हीकल, लद्दाखी पोनी और लद्दाखी ऊंट भी इस बार परेड का हिस्सा होंगे. सेना की ओर से इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सेंटर की झांकी भी प्रदर्शित की जाएगी. कुल मिलाकर सेना के 6 मार्चिंग कंटिंजेंट परेड में शामिल होंगे, इसके साथ ही नेवी और एयरफोर्स दस्ते भी मार्च करते नजर आएंगे. बीएसएफ के दो ऊंट दस्ते, एयरफोर्स टैब्लो और नेवी टैब्लो भी परेड का आकर्षण होंगे. इस साल कुल 30 झांकियां निकाली जाएंगी, जिनमें 17 राज्यों और 10 केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियां शामिल होंगी.

इस बार गणतंत्र दिवस पर तीनों सेनाओं की झांकी में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की मारक क्षमता की झलक दिखाई देगी. ‘ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्तता के माध्यम से विजय’ थीम पर आधारित यह झांकी राष्ट्र के विकसित सैन्य सिद्धांत का प्रभावशाली और सशक्त चित्रण होगी जो सटीकता, एकीकरण और स्वदेशी श्रेष्ठता की दिशा में निर्णायक परिवर्तन को दर्शाती है. इसमें भारत की ओर से सख्त संदेश भी दिया गया है कि निर्णायक, संयुक्त और आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति का युग आ चुका है.

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