अकलतरा संवाददाता – निलेश सिंह
मनरेगा बचाओ संघर्ष अभियान के तहत आज इंदिरा उद्यान, अकलतरा में बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूर भाइयों-बहनों ने भाग लिया। इस चर्चा कार्यक्रम में वक्ताओं ने केंद्र सरकार की हालिया नीतियों पर कड़ा प्रहार किया और बताया कि ये बदलाव गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण परिवारों के जीवन को खतरे में डाल रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मजदूरों को सरकार की ‘गलत नियत’ से लाई गईं नीतियों के बारे में विस्तार से अवगत कराया।कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य वक्ता ने कहा, “मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों के सम्मानजनक जीवन का आधार है।
” उन्होंने बताया कि मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) 2005 से ग्रामीण भारत की रीढ़ रहा है, जो 100 दिन के न्यूनतम काम की गारंटी देता है। लेकिन हाल के बदलावों, जैसे काम की मांग में कटौती, ऑनलाइन पंजीकरण की जटिलताएं और बजट में कमी ने लाखों मजदूरों को बेरोजगार कर दिया है। अकलतरा क्षेत्र के सैकड़ों मजदूरों ने अपनी आपबीती साझा की, जिसमें देरी से मजदूरी भुगतान और काम की कमी जैसी समस्याओं का जिक्र प्रमुख था।

‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी और जवाबदेही की गारंटी।मनरेगा में किए गए बदलावों की तत्काल वापसी।
काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली।
न्यूनतम मजदूरी ₹400 सुनिश्चित की जाए।

कांग्रेस नेता ने कहा, “हम मजदूरों के हक और अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्षरत रहेंगे। जनहित, मजदूर हित और संविधान की रक्षा के इस संघर्ष में कांग्रेस सदैव मजदूरों के साथ खड़ी है।” कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे, जिन्होंने आश्वासन दिया कि यह अभियान पूरे राज्य में फैलाया जाएगा।यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर चल रहा है, जहां विपक्षी दल सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं। स्थानीय मजदूर नेता रमेश साहू ने बताया, “अकलतरा ब्लॉक में पिछले छह महीनों में 40% काम प्रभावित हुआ है। बिना मनरेगा के ग्रामीण परिवार भुखमरी के कगार पर हैं।”









