भरतपुर संवाददाता – जवाहर यादव
भरतपुर जिले के वनांचल क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत ओहनिया में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में एक बार फिर फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत में इंजीनियर और सरपंच की मिलीभगत से लगातार मनरेगा कार्यों में अनियमितताएं की जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
जानकारी के अनुसार पंचायत में मनरेगा के लिए जिम्मेदार रोजगार सहायक और सचिवों की भूमिका लगभग समाप्त कर दी गई है। जबकि नियमानुसार मनरेगा के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों की होती है। आरोप है कि सरपंच द्वारा मनमाने तरीके से रोल संचालित किए जा रहे हैं। पंचों को डबल हाजिरी दी जा रही है, वहीं सरपंच अपने करीबी लोगों को बिना कार्य किए ही हाजिरी लगाकर भुगतान दिलवा रहे हैं।
मामले को लेकर जनप्रतिनिधि एवं जिला सह मीडिया प्रभारी द्वारा जब इंजीनियर, रोजगार सहायक एवं सचिव से चर्चा की गई, तो उनका कहना था कि वे इस मामले में कुछ नहीं कर सकते। वहीं यह भी आरोप है कि संबंधित इंजीनियर को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए थे कि जो कार्य गलत हैं, उनका मूल्यांकन न किया जाए, इसके बावजूद इंजीनियर द्वारा मूल्यांकन कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।
इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या पंचायत में सरपंच बनने के बाद मनमानी करने का अधिकार मिल जाता है? और क्या मनरेगा में हो रहा यह फर्जीवाड़ा सरपंच और इंजीनियर की आपसी मिलीभगत से ही संचालित हो रहा है?
अब देखना यह होगा कि फर्जी हाजिरी के माध्यम से जारी की गई राशि की जिम्मेदारी कौन लेगा—सरपंच, संबंधित इंजीनियर या फिर शासन को ही इसका आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।









