Home चर्चा में 5 हजार फीट ऊंचे नक्सल किले कर्रेगुट्टा हिल्स पर लहरा उठा तिरंगा

5 हजार फीट ऊंचे नक्सल किले कर्रेगुट्टा हिल्स पर लहरा उठा तिरंगा

3
0

= आजादी के बाद पहली बार लाल झंडे की जगह राष्ट्रीय ध्वज की शान =
= राष्ट्रीय पर्वों पर बैन लगा रखा था नक्सलियों ने =
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। जो इलाका दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेलता आ रहा था, जहां नक्सलियों ने राष्ट्रीय पर्व मनाने पर पाबंदी लगा रखी थी, जहां लाल झंडे के सिवाय कोई दूसरा झंडा फहर नहीं सकता था और जहां नक्सलियों की इजाजत के बिना परिंदा भी पर नहीं मार सकता था, उस नक्सल गढ़ में आजादी के बाद पहली बार हमारा प्यारा तिरंगा बड़े शान से लहरा उठा। पांच हजार फीट ऊंचे नक्सल किले कर्रेगुट्टा हिल्स पर लहराते तिरंगे ने तेजी से बदलते और लाल आतंक के स्याह साये से मुक्त होते बस्तर में आ रही खुशहाली की बड़ी बानगी पेश की है।


यह सुखद खबर आई है बस्तर संभाग के बीजापुर जिले से। दशकों तक चली नक्सल हिंसा के अंधकार के बाद बीजापुर जिले में अब शांति, विश्वास और लोकतंत्र का उजियरा फैलता स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। लंबे समय तक माओवादी उग्रवाद से प्रभावित रहे बीजापुर जिले के वे गांव, जहां अब तक राष्ट्रीय पर्व मनाना भी संभव नहीं था। वहां इस वर्ष 26 जनवरी को पहली बार गणतंत्र दिवस पर समारोह का आयोजन किया गया। यह अवसर क्षेत्र के इतिहास में लोकतांत्रिक पुनर्स्थापना का साक्षी बना। पहले जहां लाल सलाम की गूंज सुनाई देती थी, वहां पहली बार भारत माता की जय, वंदे मातरम जैसे देशभक्ति से सराबोर नारों की गूंज गांव गांव में सुनाई दी। केंद्र एवं राज्य सरकार की समन्वित रणनीति, सुरक्षाबलों की निरंतर एवं प्रभावी कार्रवाई तथा स्थानीय ग्रामीणों के सक्रिय सहयोग से जिले के हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 15 अगस्त 25 के बाद 31 नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना की गई है। जिससे इन दुर्गम गांवों में सुरक्षा एवं प्रशासन की सशक्त उपस्थिति सुनिश्चित हुई है। इन प्रयासों के परिणाम स्वरूप इस वर्ष 31 नए ऐसे गांव जुड़े जहां ग्रामीणों एवं स्कूली बच्चों ने सुरक्षा बलों के साथ मिलकर गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व उत्साहपूर्वक मनाया। यह परिवर्तन उन दूरस्थ अंचलों में एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है, जहां कभी नक्सली हिंसा के कारण सामान्य जनजीवन और लोकतांत्रिक गतिविधियां बाधित रहती थीं। सुरक्षा कैंपों की स्थापना से न केवल कानून-व्यवस्था सुदृढ़ हुई है, बल्कि जनजीवन भी सामान्य हुआ है। इन कैंपों ने विकास कार्यों का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार एवं बैंकिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं अब धीरे-धीरे ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं। सुरक्षा बलों और प्रशासन की सतत मौजूदगी से स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।

ग्रामीणों में गजब का उत्साह
जिन क्षेत्रों में पहले राष्ट्रीय पर्व मनाने पर प्रतिबंध था। वहां ग्रामीण स्वयं उत्साह के साथ तिरंगा फहराने एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आगे आ रहे हैं। यह बदलाव क्षेत्र को माओवाद के भय से बाहर निकालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।गणतंत्र दिवस पर बीजापुर जिले के ऐसे सुदूर गांव, जहां कभी राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर प्रतिबंध था। वहां सुरक्षा बलों के साथ ग्रामीणों, स्कूली बच्चों एवं जनप्रतिनिधियों ने पहली बार तिरंगा फहराया। सभी ने मिलकर इस राष्ट्रीय पर्व को उत्सव के रूप में मनाया। यह आयोजन एकजुटता, शांति, लोकतंत्र और विकास की विजय का सशक्त संदेश लेकर आया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here