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भगवान बालाजी के श्रीरणों में स्वर्ण कलश समर्पित

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

= आज रात महा अभिषेक और श्रीनिवास कल्याणम् =
जगदलपुर। बालाजी मंदिर जगदलपुर के रजत जयंती महोत्सव के तहत सुबह नित्य आराधना और विशेष हवन के साथ तीसरे दिन के पूजा विधान शुरू हुए। आंध्र प्रदेश से पधारे पंडितों के सानिध्य में भक्तों की ओर से प्रदत्त स्वर्ण कलश वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर को समर्पित किया गया। इस विशेष रस्म में दानदाताओं सहित बड़ी संख्या में भक्तगण शामिल हुए।


इस दौरान भक्तों के हाथों से समर्पित शहद स्वर्ण कलश में पंडितों के सानिध्य में संग्रहित किया गया। इसी शहद से गुरूवार सुबह श्री बालाजी मंदिर में भगवान बालाजी, माता आंडाल एवं माता पद्मावती का महाअभिषेक किया गया। इस पावन अवसर पर हज़ारों की संख्या में नगर के श्रद्घालु जुटे। सुबह 9 बजे प्रारंभ पूजा-अर्चना के बाद यहां स्वर्ण कलश के साथ साथ चांदी और लक्ष्मी कलशों से देव प्रतिमाओं का महाअभिषेक किया गया। आंध्र से आये दैवज्ञ पंडितों की अगुवाई में श्रीबालाजी भगवान का पंचगव्य, पंचामृत, दूध, दही, इत्र, अष्टगंध आदि सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया गया। महाअभिषेक के बाद भगवान की महाआरती की गई। वार्षिक महोत्सव के तहत गुरुवार रात महत्वपूर्ण विधान “श्रीनिवास कल्याणम्” संपन्न हुआ। श्रीनिवास कल्याणम् उत्सव में भगवान का विवाह विधान संपन्न हुआ। विवाह के दौरान आम तौर पर वर- वधु पक्ष के बीच होने वाले संवाद के मध्य भक्तगणों की भीड़ के समक्ष भगवान के विवाह का स्वांग रचा जायेगा। ढोल नगाड़ों और बैंड बाजे के साथ भगवान की बारात भी निकाली जायेगी। देर रात तक चलने वाले कल्याणम् विधान के दौरान बड़ी संख्या में भक्तों के शामिल होने का अनुमान श्री बालाजी टेंपल कमेटी दि बस्तर डिस्ट्रिक्ट आंध्र एसोसिएशन ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने लगाया है।

शुक्रवार के पूजा कार्यक्रम
रजत महोत्सव के पांचवें दिन प्रात:क़ालीन सत्र में होने वाले नित्य आराधना एवं विशेष हवन के बाद सुबह 10 बजे से महिलाओं के लिए विशेष रूप से कुमकुम पूजा की आयोजित की जाएगी। मान्यता है कि महिलाएं मुख्य रूप से अपने सुहाग की रक्षा और सुख-समृद्धि के लिए कुमकुम पूजा करती हैं। यह रस्म समृद्धि के प्रतीक के रूप में देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।

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