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सूत्रों का दावा: हादसे से पहले तय हो चुका था एनसीपी का विलय, शरद पवार की भूमिका पर सबकी नजर

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अजित पवार का प्लेन एक्सीडेंट में निधन हो जाने के बाद पूरा पवार परिवार भावनात्मक रूप से एक दूसरे के करीब आता दिखाई दे रहा है। अंत्येष्टि में पावर परिवार के सभी सदस्य मौजूद रहकर एक दूसरे को ढांढस बंधाते दिख रहे थे। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस यानी नेशनल कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट की नजर अब पवार परिवार के सीनियर नेता शरद पवार के मार्गदर्शन पर नजर टिक गई हैं। इधर दोनों एनसीपी पार्टियों के विलय को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। एनसीपी सूत्रों के अनुसार चाचा शरद पवार और भतीजा अजित पवार के बीच दोनों गुटों को एकजुट करने पर सहमति बन गई थी। 8 फरवरी को विलय की घोषणा होने वाली थी। हालांकि उससे पहले दर्दनाक हादसे में उनकी मौत हो गई।

सूत्रों की मानें तो बारामती विमान हादसे के कुछ दिन पहले ही अजित पवार और शरद पवार के बीच बातचीत हुई थी। इस बातचीत में एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने पर सहमती बन गई थी। इसके बाद दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच एक बैठक हुई जिसमें आगे की प्रक्रिया पर चर्चा की गई।

सूत्रों का दावा है कि अजित पवार और शरद पवार ने जिला परिषद चुनाव के तुरंत बाद इस विलय का ऐलान करने का फैसला लिया था। बताया जा रहा है कि 8 फरवरी को इसकी घोषणा होने की तैयारी भी की गई थी, लेकिन इससे पहले ही दुखद विमान हादसे में अजित पवार नहीं रहे।

इस बीच राष्ट्रवादी पार्टी और पवार परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ऐसे समय में 85 वर्ष की उम्र में शरद पवार के सामने एक बार फिर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। साल 2023 में उनसे अलग होकर अलग रास्ता चुनने वाले भतीजे अजित पवार अब हमेशा के लिए उनसे दूर चले गए हैं। पार्टी और परिवार में बिखरी हुई कड़ियों को फिर से जोड़ने की जिम्मेदारी अब एक बार फिर शरद पवार के कंधों पर आ गई है। राष्ट्रवादी और अजित पवार गुट को फिर से एक घर में लाने की भूमिका शरद पवार को निभानी है। उनके साथ ही प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, सुप्रिया सुळे, जयंत पाटील और शशिकांत शिंदे आगे की राजनीतिक दिशा को लेकर क्या निर्णय लेते हैं, इस पर पूरे महाराष्ट्र की नजर टिकी हुई है।

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