रतनपुर संवाददाता – विमल सोनी
रतनपुर:
रतनपुर आदिवासी माघी पूर्णिमा मेले में स्थानीय साहित्यकारों और कवियों ने नगर पालिका प्रशासन व आयोजन समिति से अपनी कला प्रदर्शन के लिए मंच प्रदान करने की जोरदार मांग की है। उन्होंने तर्क दिया कि कविता हमारी सांस्कृतिक धरोहर की जीवंत आवाज है, जिसे मेले के अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तरह ही सम्मान और स्थान मिलना चाहिए।रतनपुर मेले में हर वर्ष विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जहां आसपास के गांवों व शहरों से हजारों लोग आकर आनंद लेते हैं। साहित्यकारों का कहना है कि हिंदी कविता सम्मेलन को शामिल करने से स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा, युवा पीढ़ी हिंदी व छत्तीसगढ़ी जैसी बोलियों से जुड़ेगी तथा मेले का आकर्षण और बढ़ेगा। कवि सम्मेलन हास्य-व्यंग्य के माध्यम से समाज के तनाव को कम करने का सशक्त माध्यम भी साबित होते हैं।मांग के प्रमुख बिंदुसांस्कृतिक समावेश: मेले में नृत्य, संगीत के साथ कविता का मिश्रण श्रोताओं को अधिक मनोरंजन देगा।युवा प्रोत्साहन: स्थानीय मंचों से जुड़े कवियों को अवसर मिलने से नई प्रतिभाएं उभरेंगी।प्रशासनिक लाभ: ऐसे आयोजनों से रतनपुर मेले व आयोजन समिति की ख्याति बढ़ेगी।मांग रखने वालों में प्रमुख साहित्यकार व कवि दिनेश पांडेय, शुखदेव कश्यप, डॉ. राजेंद्र कुमार वर्मा, बलराम पांडेय, जनकराम साहू, ब्रजेश श्रीवास्तव, प्रमोद कश्यप, रविंद्र सोनी, रामेश्वर संडिल्य, काशीराम साहू, डी.के. दुबे, रामानंद यादव, श्रीमती पुष्पा तिवारी व दिनेश तिवारी शामिल हैं। इन्होंने एक आवश्यक बैठक आयोजित कर यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से मेले की आयोजन समिति के समक्ष रखा।समिति से अपेक्षा है कि इस मांग पर शीघ्र विचार कर सकारात्मक निर्णय लिया जाए, ताकि रतनपुर माघी पूर्णिमा मेला साहित्यिक धरोहर से भी समृद्ध हो।











