हारून रशीद| किरंदुल
ड्राई डे के दिन शाम होते ही बिकने लगे कटे मुर्गे, पालिका आदेश बना मज़ाक
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 30 जनवरी:
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि…
एक ऐसा दिन जब देश सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं देता,
बल्कि अनुशासन और संवेदना का पालन भी करता है।
सरकारें इसे ड्राई डे घोषित करती हैं—
मांस और मदिरा के विक्रय पर रोक का स्पष्ट आदेश होता है।
लेकिन किरंदुल में इस दिन एक अलग ही तस्वीर सामने आई—
जहाँ श्रद्धांजलि के साथ-साथ
नियमों का गला भी कटता दिखा।
सुबह बंद… शाम को धड़ल्ले से बिक्री
नगर पालिका क्षेत्र में मटन और चिकन विक्रेताओं ने
सुबह तो दुकानों के शटर गिराए रखे,
लेकिन जैसे ही दोपहर ढली और शाम आई—
मुर्गों की कटाई और बिक्री फिर शुरू हो गई।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार,
संध्या काल तक कई मुर्गे कटे और बिके।
लोग पूछ रहे हैं—
अगर आदेश पूरे दिन का था,
तो शाम को यह छूट किसने दे दी?
ड्राई डे सिर्फ कागज़ पर रह गया?
गांधी जी की पुण्यतिथि कोई साधारण तारीख नहीं।
यह दिन राष्ट्र की आत्मा का दिन है।
लेकिन किरंदुल में
यह दिन प्रशासनिक ढिलाई और आदेशों की अवहेलना का उदाहरण बन गया।
यह घटना सिर्फ “मुर्गा बिकने” की खबर नहीं है—
यह खबर है कि व्यवस्था बिकने लगी है।
CMO महापात्रा बोले: कार्रवाई होगी
इस मामले पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री महापात्रा ने कहा—
> “मैं आज दिनभर बड़े अधिकारियों के साथ दौरे पर व्यस्त था।
> नियम अनुसार पूरे दिन मांस विक्रय पर प्रतिबंध रहता है।
> आपसे मिली जानकारी पर कर्मचारियों को दुकानें बंद करवाने का आदेश देता हूं।
> आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।”
सवाल दुकानदारों से बड़ा है
यह सवाल सिर्फ दुकानदारों की मनमानी का नहीं,
यह सवाल निगरानी का है।
जब ड्राई डे जैसे दिन भी
आदेशों की धज्जियाँ उड़ सकती हैं,
तो आम दिनों में नियमों की हालत क्या होगी?
किरंदुल जैसे नगर में,
जहाँ नगर पालिका “सबसे अमीर” मानी जाती है—
वहाँ व्यवस्था इतनी गरीब क्यों?
श्रद्धांजलि के दिन अनुशासन की भी श्रद्धांजलि?
गांधी जी को याद करने का मतलब
सिर्फ पुष्प चढ़ाना नहीं—
उनके सिद्धांतों का सम्मान करना भी है।
लेकिन किरंदुल की शाम ने बता दिया—
यहाँ नियमों का सम्मान
दिन ढलते ही ढल जाता है।
अब देखना होगा कि यह खबर
केवल सुर्खी बनकर रह जाती है
या सचमुच कोई कार्रवाई भी होती है।









