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रतनपुर में 1 फरवरी से लगेगा ऐतिहासिक आदिवासी माघी पूर्णिमा मेला ; आदिवासी महाकुंभ और माघ मेला उत्सव की तैयारियाँ पूरी:

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रतनपुर संवाददाता – विमल सोनी

रतनपुर-

छत्तीसगढ़ की प्राचीन राजधानी रतनपुर में माघी पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला ऐतिहासिक आदिवासी माघी पूर्णिमा मेला (आदिवासी महाकुंभ) और माघ मेला उत्सव का शुभारंभ 1 फरवरी 2026 को होगा। यह 7 दिवसीय विशाल मेला जिले के सबसे बड़े आदिवासी मेलों में से एक माना जाता है, जो हर वर्ष पारंपरिक रूप से आयोजित होता है और आसपास के जिलों तक अपनी पहचान रखता है।

नगर पालिका परिषद और प्रशासनिक अमला पूरी तरह तैयार,

रतनपुर माघी पूर्णिमा मेला एवं माघ मेला उत्सव के सुचारू संचालन के लिए नगर पालिका परिषद रतनपुर और समस्त प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद है। साफ–सफाई, पेयजल, विद्युत व्यवस्था, पार्किंग, सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा, खोया–पाया केंद्र, मार्ग दर्शक बोर्ड आदि की विस्तृत तैयारियाँ कर ली गई हैं। पुलिस विभाग, राजस्व अमला, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, राजस्व व नगर पालिका के अधिकारी–कर्मचारी लगातार मैदान में डटे हुए हैं, ताकि श्रद्धालु और मेले में आने वाले ग्रामीण व शहरी आगंतुकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

भव्य स्टाल, दुकानों की रौनक और झूले–सर्कस आकर्षण का केंद्र,

इस वर्ष मेले में बड़ी संख्या में स्टाल और दुकानों का आकर्षक रूप से साज–सज्जा किया गया है। पारंपरिक आदिवासी हस्तशिल्प, लकड़ी के शिल्प, बांबू–क्राफ्ट, लोहे के औज़ार, कृषि उपकरण, घरेलू उपयोग की सामग्री, कपड़े, खिलौने, चूड़ियाँ, आभूषण, श्रृंगार सामग्री, फास्ट फूड और स्थानीय व्यंजनों की दुकानों के साथ–साथ आधुनिक स्टाल भी लगाए गए हैं।

मेले में रंग–बिरंगे झूले, ब्रेकडांस, ड्रैगन ट्रेन, जॉय राइड, बच्चों के लिए विशेष झूले, झूला–चेन, नाव झूला आदि पूरी तरह से तैयार हैं, जो शाम ढलते ही मेले की रौनक को कई गुना बढ़ा देंगे। साथ ही सर्कस, मैजिक शो, मौत का कुंआ, खेल–तमाशे और अलग–अलग तरह के गेम जोन भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। दूर–दराज के गांवों से आए व्यापारियों ने अपने–अपने स्टाल सजा लिए हैं, जिससे पूरे मेले परिसर में एक अलग ही चहल–पहल नज़र आ रही है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और लोक-संस्कृति की झलक,

सप्ताह भर चलने वाले इस मेले में प्रतिदिन रात 8 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य, पारंपरिक आदिवासी नृत्य, लोक कला, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी गीत–संगीत की विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। आसपास के ग्रामीण अंचल के कलाकारों, स्थानीय लोक कलाकारों एवं सांस्कृतिक दलों को मंच प्रदान किया जाएगा। मेले का मुख्य मंच क्षेत्रीय कला, आदिवासी संस्कृति और छत्तीसगढ़ी लोक धरोहर से सजेगा, जो इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेगा।

उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे जनप्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि,

1 फरवरी 2026 को माघी पूर्णिमा के अवसर पर होने वाले उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डिप्टी अरुण साव तथा कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव शामिल होंगे। इसके साथ ही विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री रामसेवक पैकरा, प्रबल प्रताप जूदेव, विधायक शुशांत शुक्ला, राजेश सूर्यवंशी, मोहित जायसवाल, सूरज साधेलाल भारद्वाज, लखन पैकरा, ऋषभ चतुर्वेदी, घनश्याम रात्रे, सुभाष अग्रवाल, आनंद नगरकर, किशन तंबोली, दयाराम भारद्वाज सहित अन्य गणमान्य अतिथिगण मौजूद रहेंगे। अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति और सानिध्य में मेले का भव्य उद्घाटन किया जाएगा।

नगर पालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप का वक्तव्य-
नगर पालिका परिषद रतनपुर के अध्यक्ष लवकुश कश्यप ने बताया कि रतनपुर का माघी पूर्णिमा आदिवासी विकास मेला केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का उत्सव है। उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास है कि हर वर्ष की तुलना में इस वर्ष मेला और अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और आकर्षक हो। सफाई, रोशनी, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा और यातायात की समुचित व्यवस्था की गई है। मैं सभी श्रद्धालुओं, ग्रामीणों और दूर–दराज से आने वाले मेहमानों से अपील करता हूँ कि वे अपने परिवार सहित मेले का आनंद लें और रतनपुर की गौरवशाली परंपरा को और आगे बढ़ाएँ।” अध्यक्ष कश्यप ने यह भी कहा कि नगर पालिका के जनप्रतिनिधि और अधिकारी–कर्मचारी पूरी टीम भावना के साथ मेले की व्यवस्था में लगे हुए हैं और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर त्वरित समाधान के लिए कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क भी तैयार किए गए हैं।

प्रशासनिक कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका-
मेला सफल बनाने के लिए एसडीएम, तहसील प्रशासन, थानाधिकारी और पुलिस बल, नगर पालिका सीएमओ, इंजीनियर, स्वास्थ्य कर्मी, सफाई मित्र, बिजली विभाग, राजस्व और लाइन विभाग के कर्मचारी लगातार मौके पर सक्रिय हैं। मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे, अस्थायी पुलिस चौकी, एम्बुलेंस, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, फायर ब्रिगेड की तैनाती, बैरिकेडिंग और मार्ग–विनियमन की व्यवस्था की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण कर मेले के प्रत्येक जोन – पार्किंग, व्यापारिक स्टाल जोन, झूला–मनोरंजन जोन, सांस्कृतिक मंच, श्रद्धालु आवागमन मार्ग – को अंतिम रूप दे दिया है।हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी फरवरी माह में लगने वाला यह मेला आस-पास के गांवों, कस्बों और शहरों से आने वाले हजारों लोगों के लिए आस्था, व्यापार, मेल–मिलाप और मनोरंजन का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।

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