-आदिवासी संस्कृति और नक्काशी की बारीकियों को सराहा मुख्यमंत्री ने =
अर्जुन झा/जगदलपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर संभाग के नारायणपुर प्रवास के दौरान गढ़बेंगाल घोटुल में बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और लोक संस्कृति के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि और ग्रामीणों के आत्मीय स्वागत के बीच मुख्यमंत्री स्वयं लोक रंग में रंगे नजर आए। इस दौरान उन्होंने घोटुल की अनूठी स्थापत्य कला का अवलोकन किया और बस्तर की विभूतियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। वन विभाग और पद्मश्री पंडीराम मंडावी के मार्गदर्शन में निर्मित गढ़ बेंगाल का घोटुल पूर्णतः इको-फ्रेंडली है और लकड़ी, मिट्टी तथा बांस आदि प्राकृतिक सामग्री से बना है। मुख्यमंत्री ने घोटुल के खंभों पर की गई सूक्ष्म नक्काशी की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। यह नक्काशी स्वयं पद्मश्री पंडीराम मंडावी ने उकेरी है।

ये हैं घोटुल की खासियतें
गढ़ बेंगाल के घोटुल में लेय्योर एवं लेयोस्क कुरमा यानि युवाओं और युवतियों के लिए निर्मित अलग अलग कक्ष हैं। बिडार कुरमा यानि पारंपरिक वेशभूषा, प्राचीन वाद्ययंत्र एवं सांस्कृतिक सामग्रियों का संग्रह, सगा कुरमा यानि मेहमान निवास। यहां मुख्यमंत्री ने बस्तर के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेकर क्षेत्र की खान पान संस्कृति का सम्मान किया।
मिले ‘टाइगर बॉय’ के परिजनों से
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस प्रवास को केवल एक औपचारिक दौरा न रखते हुए इसे एक आत्मीय मिलन का रूप दिया। क्षेत्र की महान प्रतिभाओं वैद्यराज पद्मश्री हेमचंद मांझी, पद्मश्री पंडीराम मंडावी और सुप्रसिद्ध लोककलाकार बुटलू राम से भेंट कर उनका सम्मान किया। सीएम ने टाइगर बॉय रहे चेंदरु के परिजनों से भी भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि घोटुल प्राचीन काल से ही आदिवासी समाज के लिए ‘शैक्षणिक एवं संस्कार केंद्र’ रहा है। चेंदरू पार्क के समीप स्थित यह आधुनिक घोटुल न केवल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगा, बल्कि देश-दुनिया के पर्यटकों को भी आदिवासी जीवनशैली और सामाजिक व्यवस्था से परिचित कराने का सशक्त माध्यम बनेगा। गढ़बेंगाल का यह घोटुल हमारी गौरवशाली विरासत को सहेजने का प्रतीक है। हमारी सरकार बस्तर की इस अनूठी संस्कृति, परंपरा और ज्ञान को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।









