बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
शहर में दहशत का माहौल, आक्रोश भी
दल्ली राजहरा। नगर में आवारा कुत्तों का आतंक आमजन की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गया है।प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा फिर एक मासूम को भुगतना पड़ा। शहर में आवारा कुत्ते ने अचानक एक बच्चे पर हमला कर दिया। बच्चे की गर्दन और हाथ पर गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद लोगों में दहशत फैल गई है, वहीं शहरवासियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
गौरतलब है कि इस गंभीर समस्या को लेकर नागरिकों द्वारा पिछले कई माह से आगाह किया जा रहा था, इसके बावजूद नगर पालिका, नगर पंचायत और स्वास्थ्य विभाग ने कोई ठोस और स्थायी व्यवस्था नहीं की। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा था, और दुर्भाग्यवश वही हुआ, जिसकी आशंका पहले ही जताई जा चुकी थी। नगर पालिका एवं नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे पहले भी कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाल ही में एक मासूम बच्ची को भी आवारा कुत्तों ने काट लिया था। शहर की गलियों, मुख्य सड़कों और बाजार क्षेत्रों में घूमते आवारा कुत्ते राह चलते लोगों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों पर अचानक हमला कर देते हैं। कई बार बाइक सवारों को दौड़ाने के कारण सड़क दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि नगर में आवारा कुत्तों की न तो नसबंदी कराई जा रही है और न ही उन्हें पकड़ने की कोई ठोस व्यवस्था की गई है। अधिकांश कुत्तों को एंटी रेबीज का इंजेक्शन तक नहीं लगाया गया है। पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों का ध्यान इस ओर कभी जाता ही नहीं, जबकि रेबीज जैसी बीमारी सीधे तौर पर जानलेवा है। जानकारों के अनुसार रेबीज एक खतरनाक वायरस है। समय पर इलाज न मिलने पर पीड़ित की मृत्यु तय रहतीहै। चिकित्सकों के अनुसार कुत्ते के काटने की स्थिति में घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना और बिना देरी किए एंटी-रेबीज इंजेक्शन का पूरा डोज लगवाना बेहद आवश्यक होता है। बावजूद इसके, शहर में जागरूकता का अभाव है और प्रशासन द्वारा कोई नियमित अभियान भी नहीं चलाया जा रहा है। इसका सीधा असर आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों पर पड़ रहा है। शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने के बाद ही जागेगा। अब जरूरत है कि शासन और प्रशासन इस गंभीर समस्या को हल्के में लेना बंद करे और तत्काल प्रभाव से आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि दल्ली राजहरा के नागरिकों और मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।









