आरंग संवाददाता – सोमन साहू
कबीर सत्संग के द्वितीय दिवस संत धर्मेंद्र साहब ने कहा कि जीव अविनाशी है जड परिवर्तनशील, है चेतन अमर है मनुष्य का गला बिना रस्सी के बंधा हुआ है इसका कारण मनुष्य की इच्छा कामना चाहना आ सक्ती माया के कारण ही हम बंधन से मुक्त नहीं हो पाते हैं और जीवन में दुख पाते हैं मनुष्य को निष्काम भाव से कार्य करते रहने पर स्वयं देव तुल्य हो जाता है और सुख की प्राप्ति होती है किसी भी चीज में मन बंधने ना पाए, मानसिक गुलामी परंपरा का मोह जब तक नहीं छूटेगा कुसंस्कार नहीं छूटेगा, हम संस्कारवान नहीं होंगे तो मन में जलन ईर्ष्या छोटे-बड़े का भाव जब तक विद्यमान रहेगा तब तक बंधन से मुक्त नहीं हो सकते हैं वर्तमान समय में नफरत सभी और फैल गया है जो कि सबके लिए नुकसानदायक है समाज के लिए अपने स्वयं के लिए देश के लिए सभी का नुकसान है कबीर साहेब जी कहते हैं की, भगवान को पाने के लिए आंख कान नाक को बंद करने की जरूरत नहीं है बल्कि भगवान को सर्वत्र सभी प्राणियों में, समभाव से देखने की जरूरत है हमें मन से करम से वचन से, सदकार्य करते रहना चाहिए, तभी सुख की प्राप्ति हो सकती है हर कार्य को निष्काम भाव से करते रहना चाहिए

कार्यक्रम में विचार साहेब जी, संत गुरु भूषण संत गुरु जतन मनन जी समेंद्र साहेब जी सुरेंद्र जी समिति के अध्यक्ष द्वारिका साहू सूरज मास्टर उत्तम साहू बसंत साहू , यशवंत साहू गुरु शरण साहू जी संस्थान के पदाधिकारी की उपस्थिति के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ द्वितीय दिवस के कार्यक्रम में भी आंचल से काफी संख्या में सत्संग लाभ उठाने हेतु आए हुए थे सत्संग के बीच में भजन का कार्यक्रम सूरज मास्टर और गुरु शरण साहू जी के द्वारा प्रस्तुत किया जाता है









