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असम में लागू होगा बस्तर का विकास मॉडल!

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

बस्तर के कार्यों से बेहद प्रभावित हुए भ्रमण पर आए असम के अधिकारी 
असम के अफसरों ने गांवों के पीएम आवासों में कराया गृह प्रवेश 

​जगदलपुर। बस्तर ही नहीं, बल्कि समूचे ​छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व की बात है कि अब बस्तर का विकास मॉडल असम राज्य में भी लागू किया जाएगा। बस्तर के विकास कार्यों का अध्ययन करने आए असम के बड़े अधिकारी यहां हुए विकास कार्यों से बेहद प्रभावित नजर आए। उन्होंने बस्तर के विकास मॉडल को असम में भी अपनाने की बात कही है।
बस्तर जिला कभी केवल अपनी विषम भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सल हिंसा के लिए जाना जाता था, आज यही बस्तर ग्रामीण विकास की नई इबारत लिख रहा है।

बस्तर में चल रहे विकास कार्यों की सफलता की गूंज अब पूर्वोत्तर भारत तक पहुंच चुकी है। इसी परिप्रेक्ष्य में असम राज्य के उच्च अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर का दौरा कर यहां के ‘विकास मॉडल’ का न केवल गहन अध्ययन किया, बल्कि इसे अपने राज्य में अपनाने की मंशा भी जाहिर की। असम के संयुक्त आयुक्त ध्रुव ज्योति नाथ और उपायुक्त राजेंद्र पांडे के नेतृत्व में एक्सपोज़र विजिट पर पहुंचे असम के अधिकारियों के दल ने लोहंडीगुड़ा विकासखंड के सुदूर वनांचल क्षेत्रों का भ्रमण कर विकास की जमीनी हकीकत को परखा।लोहंडीगुड़ा की ग्राम पंचायत दाबपाल, एरंडवाल और छोटे परोदा में भ्रमण के दौरान एक अत्यंत भावुक और उत्साहजनक दृश्य तब देखने को मिला, जब असम के अधिकारी प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के गृह प्रवेश कार्यक्रम में शामिल हुए। सुदूर वन क्षेत्रों में पक्के मकानों को देख अधिकारी काफी प्रभावित हुए। उन्होंने न केवल अपने हाथों से फीता काटकर ग्रामीणों को उनके सपनों के घर की चाबियां सौंपी, बल्कि उनसे आत्मीय संवाद भी किया। हितग्राहियों के चेहरों पर तैरती मुस्कान और जीवन में आए बदलावों की कहानियों ने यह साबित कर दिया कि शासन की योजनाएं अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। ​आवासों के निरीक्षण के पश्चात प्रतिनिधिमंडल ने मनरेगा के तहत निर्मित आजीविका डबरी स्थलों का जायजा लिया।

यहां अधिकारियों ने ग्रामीणों को आर्थिक सशक्तिकरण का मंत्र देते हुए एक नई दिशा दिखाई। उन्होंने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि डबरी का उद्देश्य केवल जल संचय तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे आय के एक सशक्त स्रोत में बदलना होगा। अधिकारियों ने सुझाव दिया कि इसमें मछली पालन, बत्तख पालन और कृषि आधारित अन्य गतिविधियों को जोड़कर ही समन्वित खेती का मॉडल तैयार किया जा सकता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय दोगुनी करने में मील का पत्थर साबित होगा। ​दौरे के समापन पर असम के अधिकारियों ने बस्तर में चल रहे इन कार्यों को एक सफल मॉडल करार दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि असम और बस्तर की भौगोलिक चुनौतियां काफी हद तक समान हैं, और जिस कुशलता से बस्तर ने इन चुनौतियों के बीच विकास का रास्ता निकाला है, वह अनुकरणीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर के इस मॉडल को असम के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनाया जाएगा। इस पूरे अध्ययन भ्रमण के दौरान जिला पंचायत के अतिरिक्त सीईओ वीरेंद्र बहादुर, लोहंडीगुड़ा जनपद सीईओ धनेश्वर पांडे, जिला समन्वयक बी. मनिहार और जिला प्रोग्रामर शशांक नाग ने स्थानीय प्रशासन की ओर से सक्रिय भूमिका निभाते हुए मेहमान अधिकारियों को योजनाओं की बारीकियों से अवगत कराया।

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