आरंग संवाददाता – सोमन साहू
आजादी के बाद मे पहली बार केन्द्रीय बजट में किसानों की उपेक्षा की गई है देश भर में फसल उत्पादन की लागत काफी बढ़ गई है खाद बीज रासायनिक दवाइयां काफी महंगे हो गए हैं आज जरूरत था लागत में 50% जोड़कर समर्थन मूल्य तय करने की किंतु कोई भी फसल समर्थन मूल्य में आज बिक नहीं पा रही है किसान नेता पारसनाथ साहू ने कहा कि देश की आत्मा गांव में बसती है और किसान रीड की हड्डी है अगर किसान आत्मनिर्भर नहीं होगा तो देश किसी भी शर्त में विकास नहीं कर सकते छग सहित देश के किसानों को उम्मीद था कि सभी फसलों को एक अच्छा समर्थन मूल्य में खरीदी के लिए तथा पर्याप्त खाद बीज कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त मात्रा में बजट पर प्रावधान किया जाएगा जगह-जगह फूड प्रोसेसिंग संयंत्र लगाकर महंगाई को नियंत्रित की जाएगी परंतु दुर्भाग्य है कि भारत के किसानों को कुछ नहीं दिया गया छत्तीसगढ़ के किसानों को लगता है कि अगले साल धान खरीदी में भी काफी कटौती की जा सकती है इसका लक्षण छत्तीसगढ़ में पहले से उभर कर आ गया है किसानों के घोर विरोधी मोदी सरकार को इसका परिणाम भुगत ना होगा.









