भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता सामने आया है। दोनों देशों ने आपसी व्यापार को आसान बनाने के उद्देश्य से टैरिफ दरों में बदलाव पर सहमति जताई है। इस नई ट्रेड डील के तहत भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले उत्पादों पर कुल टैरिफ अब 18 प्रतिशत ही लगाया जाएगा।
अमेरिका की ओर से इस फैसले की पुष्टि वरिष्ठ अधिकारी सर्जियो गोर ने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 प्रतिशत टैरिफ को ही अंतिम माना जाएगा और इसमें आगे किसी अतिरिक्त शुल्क की योजना नहीं है।
टैरिफ में कटौती से राहत
अब तक कई भारतीय उत्पादों पर अमेरिका द्वारा ऊंचा आयात शुल्क लगाया जा रहा था, जिससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ता था। नई व्यवस्था के लागू होने से भारतीय कंपनियों की लागत घटेगी और उन्हें अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे।
नेताओं के स्तर पर बनी सहमति
इस व्यापार समझौते से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत हुई थी। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापारिक तनाव कम करने और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
वैश्विक परिस्थितियों का प्रभाव
सूत्रों के मुताबिक, इस ट्रेड डील में वैश्विक ऊर्जा और भू-राजनीतिक हालात की भी भूमिका रही है। अमेरिका लंबे समय से चाहता रहा है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर संतुलित नीति अपनाए। इसी व्यापक रणनीति के तहत व्यापारिक रुख को नरम किया गया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या मिलेगा फायदा?
भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में सीधी राहत
टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग और MSME सेक्टर को बढ़ावा
“मेक इन इंडिया” उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पकड़ मजबूत
भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी में भरोसा बढ़ेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भविष्य में व्यापक व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में एक मजबूत कदम हो सकता है। इससे निवेश, रोजगार और टेक्नोलॉजी सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।









