संवाददाता – विमल सोनी
बिलासपुर:
छत्तीसगढ़ के रतनपुर तहसील क्षेत्र में भूमि नामांतरण और राजस्व अभिलेखों में कथित धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम पाली, जिला कोरबा निवासी शिकायतकर्ता राममुरारी जायसवाल ने कलेक्टर बिलासपुर को एक विस्तृत लिखित शिकायत सौंपकर तहसील रतनपुर के तहसीलदार, हल्का पटवारी और अन्य कर्मचारियों पर मिलीभगत कर नियमों का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है और जिला प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।शिकायत के अनुसार, ग्राम रतनपुर के पटवारी हल्का क्रमांक-12 अंतर्गत खसरा नंबर 3604/3, 3604/25, 3604/23 एवं 3604/24 वाली मूल्यवान भूमि पूर्व में संयुक्त रूप से राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी। इसमें स्वर्गीय मोतीचंद जायसवाल एवं अन्य सह-खातेदारों के नाम विधिवत दर्ज थे।
आरोप है कि स्व. मोतीचंद जायसवाल के निधन के बाद, जब उनके वैध वारिसों से जुड़ी न्यायिक प्रक्रियाएं अभी लंबित थीं, तहसील कार्यालय रतनपुर के अधिकारियों और पटवारी ने जानबूझकर नियमों को ताक पर रखकर नामांतरण करा दिया। इससे भूमि के असली मालिकाना हक पर खतरा मंडरा गया है।राममुरारी जायसवाल ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया कि यह भूमि से संबंधित विवाद पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन था। जिला न्यायालय बिलासपुर ने 31 जनवरी 2018 को अपना निर्णय पारित कर दिया था, जिसके खिलाफ उच्च न्यायालय बिलासपुर में अपील लंबित है। इतना होने के बावजूद तहसील स्तर पर फर्जी पंचनामा और प्रतिवेदन तैयार कर राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई। दस्तावेजों से पता चलता है कि नामांतरण प्रकरणों में अलग-अलग तिथियों पर आदेश जारी किए गए, जबकि कुछ मामलों में एक ही भूमि के लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों मोड में प्रकरण दर्ज कराए गए। इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल उठे हैं।
शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित अधिकारियों को न्यायालयीन आदेशों और लंबित अपील की पूरी जानकारी थी, फिर भी उन्होंने स्व. मोतीचंद जायसवाल का नाम अभिलेखों से गायब कर दिया।यह मामला न केवल एक परिवार के लिए अन्याय का प्रतीक है, बल्कि पूरे क्षेत्र में राजस्व प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी कलंक लगाता है। स्थानीय किसान और भूमि मालिकों में आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि इससे डर पैदा हो गया है कि उनके अभिलेखों के साथ भी ऐसी छेड़छाड़ हो सकती है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, तहसीलदार रतनपुर, हल्का पटवारी एवं अन्य संलिप्त कर्मचारियों को तत्काल रतनपुर से हटाकर जांच को प्रभावित होने से रोका जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
जिला प्रशासन ने अभी तक इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार मामला संज्ञान में आ चुका है। जांच के बाद ही इस घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है। यह घटना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में राजस्व प्रबंधन की खामियों को उजागर करती है, जहां डिजिटल化 के बावजूद मैनुअल हेराफेरी जारी है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाएगा।







