= कुतुल को नक्सलियों ने बना रखा था राजधानी =
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। 31 मार्च 2026 यानि नक्सलवाद के खात्मे की मुकर्रर तारीख। यह डेड लाइन केंद्र सरकार ने दे रखी है। इस संकल्प को पूरा करने छत्तीसगढ़ सरकार, पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरी ताकत झोंक रखी है। इसी का नतीजा है कि अब सुरक्षा बल नक्सालियों की अघोषित राजधानी में भी घुसने में कामयाब हो गए हैं। यह एक बड़ी उपलब्धि है। इस नक्सल राजधानी में फोर्स ने नक्सल स्मारक को जमींदोज कर दिया।

बस्तर संभाग का नारायणपुर जिला नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित रहा है। इस जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र को नक्सलियों का गढ़ माना जाता है, मगर अब सुरक्षा बलों ने यहां भी अपनी पैठ जमा ली है। इसी क्रम में पुलिस एवं 41वीं वाहिनी इंडो तिब्बत बार्डर पुलिस आईटीबीपी की संयुक्त टीम ने नक्सलियों की अघोषित राजधानी माने जाने वाले कुतुल क्षेत्र के फरसगांव में निर्मित विशालकाय माओवादी स्मारक को बैक हो लोडर की मदद से ध्वस्त कर दिया। थाना कोहकामेटा क्षेत्रान्तर्गत आने वाले ग्राम फरसगांव (कुतुल) में नक्सलियों ने यह स्मारक बना रखा था, जिसे क्षेत्र में नक्सल प्रभाव और प्रतीक के रूप में देखा जा रहा था। सुरक्षा बलों ने इसे चिन्हित करते हुए कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार की मंशानुरूप नारायणपुर पुलिस की ओर से माओवाद मुक्त और सशक्त बस्तर की परिकल्पना को साकार करने के लिए लगातार माओवादी विरोधी “माड़ बचाओ” अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके तहत अबूझमाड़ क्षेत्र में नए सुरक्षा कैम्प स्थापित किए जा रहे हैं, साथ ही सड़क, पुल-पुलिया निर्माण और जनकल्याणकारी योजनाओं को अंदरूनी गांवों तक पहुंचाने में सहयोग किया जा रहा है।
इसी क्रम में शुक्रवार को जिला पुलिस बल एवं 41वीं वाहिनी आईटीबीपी की संयुक्त टीम माओवादी विरोधी अभियान एवं एरिया डॉमिनेशन के उद्देश्य से कुतुल, फरसगांव एवं आसपास के क्षेत्रों में रवाना हुई थी। इस दौरान ग्राम फरसगांव में मौजूद माओवादी स्मारक को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण तथा विकास कार्यों को निर्बाध रूप से आगे बढ़ाने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।










