अर्जुन झा/बकावंड। धान खरीदी में पटवारी की गलती या कहें मनमानी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। रिकॉर्ड में गलत अंकन की वजह से कई किसान अपना पूरा धान नहीं बेच पाए हैं,किसानों की सहमति के बिना रकबा जांच किए गलत प्रवीष्टि की गई है।
बकावंड विकासखंड में धान खरीदी में भारी अव्यवस्था हावी रही।किसान विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। सोसायटी मैनेजर और पटवारी की लापरवाही से किसान बेहद परेशान हैं। कई किसानों ने बस्तर विधायक, कलेक्टर एवं एसडीएम से न्याय की गुहार लगाई है विकासखंड के करपावंड धान खरीदी केंद्र में किसानों को जमकर छला गया है। किसानों का आरोप है कि भौतिक सत्यापन पूर्ण हो जाने के बावजूद भी उनकी सहमति के बिना धान की बिक्री नहीं हो पाई जिससे वे आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि शासन द्वारा समस्या के समाधान के लिए दो दिन का समय विभागीय अधिकारियों को दिया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। कई किसानों ने आरोप लगाया कि जानबूझकर कम मात्रा का टोकन काटा गया है, जिससे वे अपना पूरा धान एकसाथ नहीं बेच पाए।

धान बेचने पहुंचे किसानों ने बताया कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत पंजीयन कराया, भौतिक सत्यापन भी कराया गया। सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो गई है, क्योंकि उन्हें परिवहन, मजदूरी और समय का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। किसानों ने विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही और मनमानी के करने का आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। कुछ किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि बिचौलियों को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर किसानों को परेशान किया गया है।किसानों ने शासन से मांग की है कि धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और किसानों का कहना है कि बत्तीस किसानों का भौतिक सत्यापन पूरा होने के बाद भी चार किसान ही अपना धान बेच पाए हैं। शेष 28 किसान धान बेचने से वंचित रह गए। किसानों ने गलत जानकारी भेजने वाले पटवारी और कम मात्रा का टोकन काटने वाले सोसायटी मैनेजर पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।









