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पिंजरे से ‘टाइगर’ ने आते ही शुरू कर दिया खेल

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

कांग्रेस का बेड़ागर्क करने का पुराना खेल शुरू किया कवासी लखमा ने 
रिहाई के बाद लौटे लखमा को समर्थकों ने बताया बस्तर टाइगर 
अभिनंदन के पोस्टर से कांग्रेस के बड़े नेता गायब 

जगदलपुर। पिंजरे से टाइगर बाहर निकल आया है और फिर से दहाड़ने लगा है, मगर यह दहाड़ कांग्रेस को कंपाने वाली और भाजपा को चैन की नींद सुलाने के लिए लोरी साबित हो रही है। पिंजरे से बाहर आते ही यह टाइगर अपने पुराने अंदाज में नजर आ रहा है।

हम उस असल बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा की बात नहीं कर रहे हैं, जो स्वर्गवासी हो चुके हैं और जिनकी दहाड़ से खूंखार नक्सली भी कांप जाया करते थे। दिवंगत महेंद्र कर्मा को बस्तर टाइगर नाम कांग्रेस के लोगों ने नहीं बल्कि जनता ने दिया था। यहां हम बात तो पूर्व मंत्री कवासी लखमा की कर रहे हैं, जिन्हें बस्तर टाइगर नाम उनके खासम खास समर्थकों ने जेल से रिहाई के बाद दिया है। बहुचर्चित आबकारी घोटाला मामले में लंबे समय तक जेल में बंद रहे कवासी लखमा के समर्थक तब तो भीगी बिल्ली बने बैठे रहे, मगर उनकी रिहाई के बाद वे अब शेर शावक की तरह उछलने और झपट्टे मारने लगे हैं।

कवासी लखमा की जमानत पर रिहाई के उत्सव को समर्थकों बड़े जश्न के रूप में मनाया। रिहाई के बाद कवासी लखमा के गृह नगर आगमन पर सुकमा को बड़े बड़े होर्डिंग्स और पोस्टरों से सजा दिया गया था। इन होर्डिंग्स और पोस्टर्स में कांग्रेस के शीर्ष नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को इंच भर भी जगह न दी गई। एक भी होर्डिंग पोस्टर में इन तीनों बड़े नेतोओं की न तो तस्वीर नजर आई, न ही किसी कोने में उनका नाम था। बड़े नेताओं में सिर्फ सोनिया गांधी, प्रियंका वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, डॉ. चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव ही नजर आए। वहीं स्थानीय स्तर के नेताओं में विधायकद्वय लखेश्वर बघेल (बस्तर) और विक्रम शाह मंडावी (बीजापुर) व कुछ अन्य की ही तस्वीरें नजर आईं।

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सुकमा द्वारा लगवाए गए इन पोस्टर्स और होर्डिंग्स में बड़े नेताओं की उपेक्षा ने कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी को तेज हवा दे दी है। बस्तर में तो कांग्रेस की गुटबाजी का खेल कोई नया नहीं है। इस गुटबाजी के खेल के सबसे बड़े खिलाड़ी या कहें मोहरा, कवासी लखमा ही रहे हैं। राज्य के ही कुछ बड़े नेताओं द्वारा कवासी लखमा के कंधे पर रखकर चलाई गई बंदूक ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को ढेर कर दिया था। इन चुनावों में न कांग्रेस हारी, न भाजपा जीती। असल जीत तो कांग्रेस में चल रही वर्चस्व की लड़ाई और साजिश की हुई। बस्तर में कांग्रेस का भट्ठा बिठाने के बाद जेल से छूटकर आए कवासी लखमा ने फिर से अपना पुराना तेवर दिखाना और उसी गुटबाजी वाले खेल को अंजाम देना शुरू कर दिया है l

अपनी रिहाई के बाद कवासी लखमा जगदलपुर होते हुए सुकमा पहुंचे। अपने समर्थकों के बीच उन्होंने बीजेपी पर अपने ही अंदाज में निशाना साधा। खासकर उनके निशाने पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव, बीजेपी जिला अध्यक्ष धनीराम बारसे और हुंगा राम मरकाम रहे। अपनी रिहाई का श्रेय उन्होंने कांग्रेस और पूर्व सीएम भूपेश बघेल को दिया। वे बार बार भूपेश बघेल का नाम दोहराते नजर आए। वहीं अब सुकमा के बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के लगाए होर्डिंग्स और पोस्टर्स के बहाने कांग्रेस को निशाने पर लेना शुरू कर दिया है। भाजपा नेता कांग्रेस की गुटबाजी का जमकर. मजाक उड़ा रहे हैं। कांग्रेस दो गुटों में विभाजित दिख रही है। लखमा के स्वागत वाले बैनर पोस्टर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी और पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज की तस्वीरें नहीं रहने से साबित होता है कि लखमा की जेल से रिहाई पश्चात सुकमा सहित दक्षिण बस्तर में गुटबाजी और तेज होगी तथा उसका पूरा फायदा पुनः बीजेपी को ही मिलेगा।

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