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आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ है बस्तर पण्डुम,आदिवासी सांसदों को बस्तर पंडुम में मंच न मिलना पूरे बस्तर का अपमान –सुशील मौर्य

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
47000 से अधिक किसानों की नहीं हुई धान खरीदी, कैसे मनाएंगे बस्तर पंडुम..!
बिना किसी सुरक्षा मानक के आदिवासियों को बस्तर पंडूम में गाड़ियों में भरकर जानमाल से खिलवाड़ करना निंदनीय ..
  जगदलपुर
बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष सुशील मौर्य ने बस्तर जनजातीय महासभा बस्तर पण्डुम में आदिवासी सांसदों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में मंच नहीं मिलने को लेकर भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा बस्तर जनजातीय महासभा के महापर्व ‘बस्तर पण्डुम’ में एक दुर्भाग्यपूर्ण दृश्य भी देखने को मिला है राष्ट्रपति के मंच पर मुख्यमंत्री और मंत्रीगणों को तो स्थान दिया गया, किंतु बस्तर संभाग का प्रतिनिधित्व करने वाले हमारे दोनों निर्वाचित सांसद—श्री महेश कश्यप एवं श्री भोजराज नाग—को महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के कार्यक्रम में मंच पर स्थान नहीं मिलना बेहद खेदजनक है। यह वही मंच था, जहां बस्तर की अस्मिता, संस्कृति और जनजातीय गौरव की बात होनी थी, लेकिन बस्तर की आवाज़ रखने वाले जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति मंच से नदारद रहे।जिन जनजातीय समाजों के उत्सव को ‘महापर्व’ कहा गया, उन्हीं समाजों द्वारा चुने गए सांसदों को मंच से दूर रखा गया।यह निर्णय भूलवश था या सोच-समझकर लिया गया, यह विचार का विषय है। मगर संदेश साफ़ है मंच भरा रहा,पर बस्तर की आवाज़ अधूरी रह गई।बस्तर के दोनों ही सांसद आदिवासी वर्ग से आते है तथा बस्तर की जनता का प्रतिनिधित्व करते है। यह उन आदिवासी सांसदों का ही नहीं पूरे बस्तर की जनता और बस्तरिया अस्मिता का अपमान है।कुल मिलाकर भाजपा सरकार को आदिवासी अस्मिता, आदिवासियों की धार्मिक आस्था, आदिवासी संस्कृति से कोई मतलब नहीं, बस्तर में मची संसाधनों की लूट से ध्यान भटकाने के लिए केवल राजनैतिक इवेंट कर रहे हैं।केवल अपनी ब्रांडिंग के लिए आदिवासी समाज को यह सरकार बार अपमानित कर रही है।
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा बस्तर पंडुम के नाम पर करोड़ो रुपए खर्च कर अपनी ब्रांडिंग तो कर रही है वही दूसरी ओर बस्तर के 47000 से अधिक किसान अपना धान नहीं बेच पाए है जब धान खरीदी ही नहीं होगी तो बस्तर का आदिवासी किसान बस्तर पंडुम महापर्व कैसे मनाएगा? बस्तर पंडूम किसानों आदिवासियों की सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक जीवन का जीवंत प्रतिबिंब है किसान परिवार धान बेचकर इस उत्सव को मनाता है लेकिन भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण आज हजारों किसान आज पर्यंत तक धान नहीं बेच पाए है ऐसे में ये किसान बस्तर पंडुम से वंचित रह जाएंगे जिसकी पूरी जिम्मेदार भाजपा सरकार है!
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने बताया बस्तर जनजातीय महासभा के महापर्व ‘बस्तर पण्डुम’ में आदिवासियों को गाड़ियों में भर भरकर लाया जा रहा है न उनकी कोई सुरक्षा व्यवस्था की गई और न ही किसी भी प्रकार की उचित व्यवस्था! भाजपा सरकार बस्तर के आदिवासियों के स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ कर रही है। जिस पंडुम में बस्तर के जन प्रतिनिधि अपमानित हो रहे, वहां पर आम बस्तरिया आदिवासी की क्या स्थित होगी समझा जा सकता है।बिना किसी सुरक्षा मानक के आदिवासियों को बस्तर पंडूम में गाड़ियों में भर भरकर लाना आदिवासियों के जानमाल से खिलवाड़ करना बेहद निंदनीय है इसका कांग्रेस पार्टी पुरजोर विरोध करती है।

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