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दीपक बैज ने की सदशयता, कवासी लखमा की हिमायत

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= विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति मिले लखमा को: बैज =
= बैज के धुर विरोधी हैं पूर्व आबकारी मंत्री लखमा=
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर आए शराब घोटाले के आरोपी पूर्व आबकारी मंत्री एवं वर्तमान कोंटा विधायक कवासी लखमा भले ही अपने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज से खुन्नस रखते हों, मगर दीपक बैज की सदाशयता देखिए कि वे श्री लखमा की आवाज बनकर खड़े हो गए हैं।
बस्तर ही नहीं बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ के लिए यह सर्वविदित तथ्य है कि बस्तर संभाग की कोंटा (सुकमा) सीट से विधायक कवासी लखमा बस्तर के उच्च शिक्षित आदिवासी नेता दीपक बैज के धुर विरोधी हैं। कांग्रेस की राजनीति में दीपक बैज की लगातार बढ़ती पकड़ को कवासी लखमा हजम नहीं कर पा रहे हैं। बस्तर से सांसद रह चुके दीपक बैज को लोकसभा चुनाव में दोबारा टिकट न मिले इसके लिए कवासी लखमा और उनके आकाओं ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। इस साजिश में उनकी चौकड़ी सफल भी हो गई। दीपक बैज की जीत की सौ फीसदी संभावनाओं को दरकिनार करते हुए कांग्रेस हाईकमान ने बस्तर लोकसभा सीट से कवासी लखमा के बेटे हरीश कवासी को मैदान पर उतार दिया। नतीजतन बस्तर के साथ साथ कांकेर की सीट भी कांग्रेस के हाथों से निकल गई। इतना ही नहीं विधानसभा चुनावों में जब कांग्रेस ने दीपक बैज को चित्रकोट से उम्मीदवार बनाया, तो चौकड़ी फिर साजिश में लग गई। चित्रकोट, जगदलपुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा आदि सीटों पर अपनी ही पार्टी के उम्मीदवारों को हराने के लिए कवासी लखमा और उनके आकाओं ने दिनरात एक कर दिया था। इन सीटों पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इस चौकड़ी ने इन सीटों पर उम्मीदवारों को नहीं हराया, बल्कि कांग्रेस की अंतिम यात्रा निकाल दी।. जिस बस्तर में कभी कांग्रेस का बोलबाला हुआ करता था, वहां आज भारतीय जनता पार्टी का डंका बज रहा है।बस्तर में कांग्रेस का बंठाधार करने में कवासी लखमा और प्रदेश स्तर के तीन बड़े नेताओं तथा हालिया राष्ट्रीय स्तर पर ओहदा प्राप्त एक कांग्रेस नेता का बड़ा योगदान है। कांग्रेस की यह चौकड़ी आज भी दीपक बैज को नीचा दिखाने की हरकत से बाज नहीं आ रही है। छत्तीसगढ़ में कथित तौर पर हुए हजारों करोड़ के शराब घोटाले के मामले में आरोपी कवासी लखमा कई माह तक रायपुर सेंट्रल जेल में बंद रहे। लंबी कवायद के बाद सुप्रीम कोर्ट से उन्हें अंतरिम जमानत मिली है। जमानत अवधि में लखमा को राज्य से बाहर रहना होगा। लखमा कोंटा सीट से विधायक हैं। जब वे जमानत पर छूटकर जेल से बाहर आए, तो उनके समर्थकों और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सुकमा ने लखमा के गृहनगर सुकमा को स्वागत अभिनंदन के बैनर पोस्टर्स से पूरे सुकमा नगर को पाट दिया था। ढोल ढमाके और आतिशबाजी के साथ कवासी लखमा का स्वागत किया गया। बैनर पोस्टर्स में उन्हें बस्तर टाइगर की उपाधि से विभूषित किया गया था। यहां भी दुर्भावना का खेल चला।. कवासी लखमा के स्वागत अभिनंदन वाले बैनर्स पोस्टर्स में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की न तो तस्वीरें नजर आईं न कहीं नाम दिखा। बैज के प्रति ये दुर्भावना की पराकाष्ठा थी। मगर जिस तरह भगवान शंकर ने सृष्टि को नष्ट होने से बचाने के लिए अपने कंठ में विष को धारण कर लिया था, उसी तरह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने अपने अपमान को अपने दिल में दबाकर पार्टी हित में ही बात उठाई है। दीपक बैज का एक ताजा वीडियो सामने आया है, जिसमें वे कवासी लखमा की खुलकर हिमायत करते नजर आ रहे हैं। पार्टी का विधायक होने के नाते पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने कवासी लखमा के विधानसभा सत्र में हिस्सा लेने पर बड़ी बात कही है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में चुने हुए जनप्रतिनिधि को जब वह जमानत पर हो तो भी उन्हें अपने क्षेत्र की जनसमस्या को सदन में रखने की अनुमति मिलनी चाहिए। दीपक बैज के इस बयान ने साफ जाहिर है कि व्यक्तिगत मन मुटाव की बजाय पार्टी हित दीपक बैज के लिए सर्वोपरि है।

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