भारतीय राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो अपने पद से नहीं, बल्कि अपने आचरण, संवेदनशीलता और कार्यशैली से लोगों के दिलों में जगह बनाते हैं। श्रीमती सुषमा स्वराज ऐसा ही एक नाम हैं। वे एक प्रखर वक्ता, कुशल प्रशासक और जनसेवा के प्रति समर्पित नेता थीं, जिन्होंने देश और विदेश—दोनों स्तरों पर भारत की गरिमा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला छावनी में हुआ। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से विधि (कानून) की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही वे वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में सक्रिय रहीं और अपनी प्रभावशाली वाणी के कारण विशेष पहचान बनाई। यही ओजस्वी शैली आगे चलकर उनकी राजनीतिक पहचान बनी।
राजनीतिक यात्रा की शुरुआत
सुषमा स्वराज ने बहुत कम उम्र में राजनीति में कदम रखा और 25 वर्ष की आयु में हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनकर एक रिकॉर्ड स्थापित किया। वे भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहीं और संगठन तथा सरकार—दोनों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं।
वे दिल्ली की मुख्यमंत्री भी रहीं और बाद में केंद्र सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उनकी प्रशासनिक क्षमता, स्पष्ट सोच और निर्णय लेने की योग्यता ने उन्हें एक सशक्त नेता के रूप में स्थापित किया।
विदेश मंत्री के रूप में नई पहचान
साल 2014 से 2019 तक वे भारत की विदेश मंत्री रहीं। इस पद पर रहते हुए उन्होंने भारतीय कूटनीति को मानवीय स्पर्श दिया। सोशल मीडिया के माध्यम से विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद करना उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान बन गई। संकट की घड़ी में वे तुरंत प्रतिक्रिया देती थीं और कई भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाने में अहम भूमिका निभाई।
उनके कार्यकाल में भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि मजबूत हुई और दुनिया के कई देशों के साथ संबंधों में नई ऊर्जा आई। वे अपनी सरल भाषा, आत्मविश्वास और दृढ़ नेतृत्व के लिए जानी जाती थीं।
संसदीय जीवन और वक्तृत्व कला
सुषमा स्वराज भारतीय संसद की उन चुनिंदा नेताओं में थीं, जिनके भाषणों को पक्ष और विपक्ष—दोनों ही ध्यान से सुनते थे। उनकी भाषा प्रभावशाली, तर्कपूर्ण और मर्यादित होती थी। वे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत संबंधों में सौहार्द बनाए रखने में विश्वास रखती थीं।
व्यक्तित्व और विरासत
सुषमा स्वराज का व्यक्तित्व सादगी, संवेदनशीलता और दृढ़ता का संगम था। वे एक ऐसी नेता थीं जिन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम माना। 6 अगस्त 2019 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके द्वारा स्थापित मानवीय और जिम्मेदार नेतृत्व की मिसाल आज भी प्रेरणा देती है।
भारतीय राजनीति में उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। वे न केवल एक सफल राजनेता थीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए आशा, भरोसे और सम्मान का प्रतीक भी थीं।









