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भस्मासुर से बचने बस्तर की इस गुफा में छुपे थे भोलेनाथ, शबरी नदी के उस पार है आस्था की गुप्तेश्वर गुफा

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

भगवान श्रीराम ने इसी जगह बिताया था चातुर्मास
बांस से निर्मित पुल के सहारे नदी पार कर गुफा में पहुंचते हैं श्रद्धालु 

जगदलपुर। बस्तर के पहाड़, नदी नाले, झरने सबके सब रहस्यों से भरे पड़े हैं। भगवान भोलेनाथ और श्रीरामचंद्र से जुड़ी अनेक प्राचीन धरोहरें बस्तर की रहस्यमयी वादियों में स्थित हैं। इन्हीं में से एक है गुप्तेश्वर धाम। गुप्तेश्वर धाम एक ऎसी गुफा वाला आस्था स्थल है, जहां भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान चातुर्मास बिताया था।भस्मासुर राक्षस से बचने के लिए भगवान भोलेनाथ ने इसी गुफा में शरण ली थी।
छत्तीसगढ़ और उड़ीसा प्रांत के मध्य बहने वाली शबरी नदी किनारे गुप्तेश्वर धाम आस्था का बड़ा केंद्र है। पौराणिक मान्यता है कि भस्मासुर से बचने भोलेनाथ इस गुफा में छिपे थे। यहीं अपने वनवास के दौरान शिव आराधना करते हुए भगवान राम ने सीता और लक्ष्मण के साथ चातुर्मास व्यतीत किया था।

पौराणिक मान्यता है कि जब भस्मासुर ने भगवान शिव से मिले वरदान का परीक्षण करने शिवजी पर ही हाथ रखने का प्रयास किया, तो उससे बचने भोलेनाथ देवों के देव महादेव ने इसी गुफा में छुपकर अपने ऊपर आए संकट को टाला था। दूसरी मान्यता यह है कि भगवान श्रीराम वनवास के दौरान जब दंडकारण्य पहुंचे थे, तब उन्होंने गुप्तेश्वर गुफा में अपना चातुर्मास व्यतीत किया था। गुप्तेश्वर गुफा के पुजारी दीनबंधु बताते हैं कि भस्मासुर वाली घटना के बाद भगवान शिव इसी गुफा में रहते थे। शिकार करने आए एक व्यक्ति ने उन्हें देख लिया। शिवजी ने उन्हें सचेत किया कि इस बात की जानकारी किसी को न दे, उसने किसी को बताया तो उसका सर विखंडित हो जाएगा। इस बात की जानकारी जैपुर महाराजा को मिली। आदिवासी ने डरकर राजा को भगवान भोलेनाथ के गुफा में छुपे होने की बात बता दी।

ऐसा करते ही आदिवासी का सर फट गया और उसकी मौत हो गई। इससे राजा को अपने किए पर पछतावा हुआ। वर्ष 1760 के आसपास राजा ने इस गुफा की खोज की। यह स्थल छत्तीसगढ़ और उड़ीसा की अमरनाथ गुफा के नाम से चर्चित है। गुफा में प्राकृतिक शिवलिंग है। शिवलिंग की ऊंचाई लगभग छह फीट तथा व्यास (गोलाई) आठ फीट है। गुफा के ठीक सामने नंदी प्रतिमा विराजमान है। वहीं गुफा द्वार के सामने श्रृंगी ऋषि और भृंगी ऋषि की प्रतिभाएं स्थापित हैं। बस्तर की तरफ से लोग गुप्तेश्वर पहुंच सकें इसलिए वन विभाग द्वारा पथरीली शबरी नदी के उपर लगभग 700 मीटर लंबा बांस का पुल बनाया गया है, इस पुल पर बांस से ही निर्मित चटाई बिछाकर मार्ग सुगम किया है। यह गुफा सघन वन क्षेत्र और हिंसक वन्य प्राणियों की वजह से हजारों वर्षों तक श्रद्धालुओं से दूर रही।
महाशिवरात्रि के दिन गुप्तेश्वर में एक लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ पहुंचती है। इस कारण लोग शिवरात्रि से दो दिन पहले ही भोलेनाथ का दर्शन करने यहां पहुंचने लगते हैं। इस बार भी यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचे।

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