बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
आदिवासियों का हक छीन कर जमीन, खनिज संपदा रसूखदारों को सौंप रही है भाजपा सरकार
जगदलपुर। कोरंडम खदान की स्वीकृति पर बीजापुर के जिला खनिज अधिकारी द्वारा जारी बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जानबूझकर की जा रही उपेक्षा को छिपाने की कोशिश भाजपा की सरकार और जिला प्रशासन कर रहे हैं।
कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने कहा है कि भाजपा सरकार बस्तर के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को रसूखदारों और उद्योगपतियों को सौंपने की साजिश रच रही है। और इसे “कानूनी” दिखाने के लिए झूठे तर्क गढ़ रही है। विधायक विक्रम शाह मंडावी ने कहा है कि बीजापुर जिला पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाला अनुसूचित क्षेत्र है। जहां पेसा एक्ट 1996 (पंचायतों का विस्तार अनुसूचित क्षेत्रों तक अधिनियम) लागू है। कानून के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में गौण खनिजों जिसमें कोरंडम शामिल है, के लिए पट्टा या लीज देने से पहले ग्रामसभा की पूर्व अनुशंसा अनिवार्य है। विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि प्रशासन ग्राम पंचायत रुद्रारम और जनपद पंचायत भोपालपटनम के 25 मार्च 2011 के प्रस्ताव के आधार पर अनापत्ति ली गई थी। लेकिन यह प्रस्ताव 14 साल पुराना है। वर्षों बाद 2025 में खदान स्वीकृति देते समय वर्तमान ग्रामसभा की सहमति क्यों नहीं ली गई? पेसा के छत्तीसगढ़ नियमों जैसे छत्तीसगढ़ माइनर मिनरल रूल्स 2015 में स्पष्ट है कि ग्रामसभा की पूर्व अनुशंसा अनिवार्य है। पुराने प्रस्ताव को आधार बनाकर नई स्वीकृति देना कानून की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। विधायक विक्रम मंडावी ने अपने आगे कहा कि विभाग कह रहा है कि 5.0 हेक्टेयर से कम क्षेत्र होने और कलस्टर न होने से जनसुनवाई अनिवार्य नहीं है। यह आंशिक रूप से सही लग सकता है, लेकिन अधिसूचना के तहत गौण खनिजों की सभी खदानों (5 हेक्टेयर से कम भी) के लिए पर्यावरण स्वीकृति अनिवार्य है। और बी 2 कैटेगरी में डीईएसी, डीईएए द्वारा मूल्यांकन होता है। लेकिन पेसा वाले अनुसूचित क्षेत्रों में जनसुनवाई और ग्राम सभा की सहमति पर्यावरण प्रक्रिया से अलग नहीं है। यह अतिरिक्त सुरक्षा है। 3.70 हेक्टेयर क्षेत्र होने के बावजूद आदिवासी बहुल इलाके में ऐसी खदान से जंगल, पानी और आजीविका पर गहरा असर पड़ेगा। बिना स्थानीय लोगों की सुनवाई के यह स्वीकृति अवैध और एकतरफा है।विधायक ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन की सरकार और प्रशासन यह बात जानबूझकर छुपा रही है कि 5 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि के लिए अलग नियम हैं। यहां छोटे-छोटे टुकड़ों में खदानें देकर पर्यावरण नियमों को चकमा दिया जा रहा है। यह भाजपा सरकार की साजिश है। उन्होंने आगे कहा बड़े क्षेत्रों को टुकड़ों में बांटकर, बिना जनसुनवाई के, रसूखदारों और कॉर्पोरेट हितों को खदान सौंप कर बस्तर के आदिवासियों को विकास के नाम पर विस्थापित कर उनकी जमीन छीनी जा रही है। विधायक विक्रम मंडावी ने भाजपा कसरकार और प्रशासन से मांग करते हुए कहा है कि, इस पर्यावरण स्वीकृति पत्र को तत्काल रद्द किया जाए। ग्राम कुचनूर की ग्रामसभा बैठक बुलाकर उनकी स्पष्ट सहमति ली जाए। जैसा पेसा कानून में अनिवार्य है। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से दोबारा शुरू की जाए जिसमें जनसुनवाई और ग्रामसभा की भूमिका सुनिश्चित हो।विधायक विक्रम मंडावी ने यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो भाजपा सरकार जो लगातार आदिवासियों को विकास के नाम पर धोखा देने का काम रही है। बस्तर के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को बचाने के लिए आने वाले समय में आदिवासियों के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे।









