नई दिल्ली। फाल्गुन अमावस्या इस वर्ष 17 फरवरी 2026 को पड़ रही है। पंचांग के अनुसार अमावस्या की तिथि 16 फरवरी, सोमवार शाम 5:34 बजे से शुरू होकर 17 फरवरी, मंगलवार शाम 5:30 बजे तक रहेगी। धार्मिक परंपरा के अनुसार अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण और दान करना शुभ माना जाता है, जिससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
इस बार अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण भी लगने वाला है, जिससे लोगों में यह भ्रम है कि स्नान, दान और पितृ तर्पण के समय में बदलाव होगा या नहीं।
सूर्य ग्रहण कहाँ दिखाई देगा
साल का पहला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इस दौरान सूतक काल का पालन नहीं किया जाएगा। यह ग्रहण अटलांटिक महासागर, अर्जेंटीना, चिली, कोमोरोस, मॉरीशस, आइसलैंड, दक्षिण अफ्रीका और तंजानिया जैसे देशों में देखा जा सकेगा।
सूर्य ग्रहण का समय
ग्रहण की शुरुआत: दोपहर 3:26 बजे
मध्यकाल (पीक समय): 5:42 बजे
ग्रहण का अंत: शाम 7:57 बजे
यदि यह ग्रहण भारत में दिखाई देता, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल ग्रहण के 12 घंटे पहले से माना जाता।
इस वर्ष भारत में फाल्गुन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा, इसलिए तर्पण, स्नान और दान के समय में कोई बदलाव नहीं होगा। लोग पारंपरिक समय अनुसार ही पूजा और दान कर सकते हैं।









