भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में वासुदेव बलवंत फड़के का नाम अत्यंत सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है। उन्हें भारतीय सशस्त्र क्रांति का जनक माना जाता है। उनकी पुण्यतिथि 17 फरवरी को पूरे देश में श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ मनाई जाती है। यह दिन हमें उनके त्याग, साहस और राष्ट्रप्रेम की याद दिलाता है।
वासुदेव बलवंत फड़के का जन्म 4 नवंबर 1845 को महाराष्ट्र में हुआ था। बचपन से ही उनके मन में देश के प्रति गहरा प्रेम और अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के प्रति आक्रोश था। उस समय अंग्रेजी शासन के कारण देश की जनता अत्यंत कष्ट झेल रही थी। किसानों पर अत्यधिक कर, भुखमरी और अन्यायपूर्ण नीतियों ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया था। इन परिस्थितियों ने फड़के जी को क्रांति का मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने आम जनता, विशेषकर किसानों और युवाओं को संगठित किया तथा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का आह्वान किया। उनका उद्देश्य केवल अंग्रेजों को पराजित करना नहीं था, बल्कि भारत को स्वतंत्र और स्वाभिमानी राष्ट्र बनाना था। उनके साहसिक प्रयासों से अंग्रेजी सरकार चिंतित हो उठी।
अंततः अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर दूर स्थित Aden की जेल में भेज दिया। वहीं 17 फरवरी 1883 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया; उनके संघर्ष ने आगे आने वाले अनेक क्रांतिकारियों को प्रेरणा दी और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।
वासुदेव बलवंत फड़के की पुण्यतिथि हमें यह संदेश देती है कि राष्ट्र की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए त्याग और साहस आवश्यक है। उनके जीवन से हमें देशभक्ति, निष्ठा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा मिलती है।









