भारत और फ्रांस के बीच आज एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस बड़ी डील के तहत भारत 114 अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान खरीदेगा। यह सौदा भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा करने वाला माना जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच रक्षा सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
राफेल डील क्यों है खास?
राफेल एक अत्याधुनिक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जिसे फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation बनाती है। यह विमान हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने में सक्षम है। इसमें उन्नत रडार, मिसाइल सिस्टम और आधुनिक एवियोनिक्स तकनीक लगी है, जो इसे दुनिया के सबसे सक्षम लड़ाकू विमानों में शामिल करती है।
पहले भी भारत 36 राफेल विमान खरीद चुका है, जो वर्तमान में भारतीय वायुसेना में शामिल हैं। अब 114 नए राफेल विमानों की खरीद से वायुसेना की स्क्वाड्रन क्षमता में बड़ा सुधार होगा। माना जा रहा है कि इस डील के तहत “मेक इन इंडिया” के तहत कुछ विमानों का निर्माण भारत में भी किया जा सकता है, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
रणनीतिक साझेदारी को मजबूती
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में और मजबूत हुए हैं। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति पर काम कर रहे हैं। यह डील दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और सामरिक सहयोग का प्रतीक मानी जा रही है।
आर्थिक और तकनीकी लाभ
इस सौदे से न केवल भारत की सैन्य शक्ति मजबूत होगी, बल्कि रक्षा उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी सकारात्मक असर पड़ेगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारत की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहद महत्वपूर्ण है।
मुंबई में होने वाली प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। यह समझौता भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर उसकी रणनीतिक स्थिति को भी और सशक्त करेगा।









