छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। कोतवाली थाना क्षेत्र के चंदरपुर गांव में मंगलवार रात जहरीले धुएं के कारण एक आदिवासी दंपती और उनकी तीन वर्षीय बेटी की मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक ठंड से बचने के लिए घर के भीतर सिगड़ी जलाकर सोना ही इस हादसे की वजह बना।
ठंड से बचाव बना जानलेवा
ग्राम चंदरपुर निवासी 28 वर्षीय कवल सिंह गोंड अपनी पत्नी कुंती (25 वर्ष) और तीन साल की बेटी ममता के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घर में रह रहे थे। मंगलवार रात ठंड अधिक होने के कारण परिवार ने कमरे के अंदर सिगड़ी जलाई और सो गए।
सुबह जब काफी देर तक घर का दरवाजा नहीं खुला तो ग्रामीणों को शक हुआ। अंदर जाकर देखा तो तीनों अचेत पड़े थे। आशंका जताई जा रही है कि कोयले की सिगड़ी से निकली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण दम घुटने से उनकी मौत हो गई।
दो बच्चे बच गए
परिवार के दो अन्य बच्चे—प्रिंस (7 वर्ष) और प्राची (5 वर्ष)—मंगलवार को ही अपने दादा के घर ग्राम कोट चले गए थे। इसी कारण उनकी जान बच गई।
वेंटिलेशन की कमी बनी वजह
बताया जा रहा है कि जिस मकान में परिवार रह रहा था, वहां हवा के निकास की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। कमरे में वेंटिलेशन नहीं होने के कारण धुआं बाहर नहीं निकल सका और जहरीली गैस पूरे कमरे में भर गई।
पुलिस कर रही जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत के सटीक कारण की पुष्टि होगी, हालांकि प्राथमिक तौर पर इसे दम घुटने से हुई मौत माना जा रहा है।
यह घटना ठंड के मौसम में बंद कमरों में सिगड़ी या अंगीठी जलाने के खतरों की गंभीर चेतावनी भी देती है।









