पुकार बाफना/बीजापुर, 21 फरवरी 2026/ एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग तथा शिखर युवा मंच बीजापुर के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम पालनार में संचालित “विशेष मलेरिया रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम” के तृतीय दिवस का सफल आयोजन किया गया। यह अभियान उन ग्रामों में विशेष रूप से चलाया जा रहा है, जहाँ पूर्व में मलेरिया के अधिक प्रकरण दर्ज किए गए थे।
47 आरडीटी जांच, 02 मरीज पॉजिटिव
अभियान के अंतर्गत कुल 47 आरडीटी (रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट) किए गए, जिनमें 02 मरीज पॉजिटिव पाए गए। दोनों मरीजों को तत्काल निःशुल्क दवा उपलब्ध कराई गई तथा नियमित फॉलोअप की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
इसके अतिरिक्त 261 हितग्राहियों को मच्छरदानियों एवं जागरूकता पम्पलेट का वितरण किया गया।
विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
कार्यक्रम में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास गवेल एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) से डॉ. जोशी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने ग्रामीणों को मलेरिया के प्रमुख लक्षण—लगातार बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द एवं कमजोरी—की विस्तृत जानकारी दी।
साथ ही समय पर जांच कराने, चिकित्सकीय परामर्श अनुसार पूर्ण दवा सेवन करने तथा नियमित रूप से मच्छरदानी उपयोग करने पर विशेष जोर दिया गया।
चिन्हित ग्रामों में विशेष फोकस
कार्यक्रम के समन्वयक मुकेश मानिकपुरी ने बताया कि संतोषपुर, गोरना, भोगामुड़ा, कचलारम एवं पालनार जैसे ग्रामों में पूर्व में मलेरिया के अधिक मामले सामने आए थे। इसी को ध्यान में रखते हुए व्यापक नियंत्रण एवं जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि समय रहते रोग की पहचान और समुचित उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
स्वच्छता अभियान से मच्छरों पर वार
स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्राम में विशेष सफाई अभियान भी चलाया गया। जल जमाव वाले स्थानों की पहचान कर उनकी सफाई की गई तथा लार्वीसाइड एवं ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कर मच्छरों के प्रजनन को रोकने का प्रयास किया गया।
जनसहभागिता से मजबूत हो रहा अभियान
ग्राम सरपंच श्रीमती मालती ताती ने ग्रामीणों से अपील की कि सभी लोग नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करें, घर एवं आसपास स्वच्छता बनाए रखें तथा बुखार होने पर तत्काल जांच कराएं।
कार्यक्रम में 300 से अधिक ग्रामीणों की सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता रही, जो क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता के प्रति बढ़ती सजगता को दर्शाती है।
यह विशेष अभियान न केवल मलेरिया नियंत्रण की दिशा में एक सशक्त पहल है, बल्कि सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से स्वस्थ, स्वच्छ एवं सुरक्षित ग्राम निर्माण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।









