बीजापुर संवाददाता – पुकार बाफना
भोपालपटनम।
ओपन बोर्ड की 10वीं-12वीं परीक्षाओं के फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू होते ही निजी शिक्षण संस्थानों पर मनमानी वसूली के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
अभिभावकों का कहना है कि जहां ओपन परीक्षा की आधिकारिक फीस लगभग 1500 रुपये निर्धारित है, वहीं कुछ स्कूल और निजी केंद्र छात्रों से 2500 से 3000 रुपये तक वसूल रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बोर्ड द्वारा तय शुल्क के अतिरिक्त “सुविधा शुल्क”, “प्रोसेसिंग फीस” और अन्य नामों से अतिरिक्त राशि ली जा रही है। परिजनों का आरोप है कि विरोध करने पर फॉर्म भरने में देरी करने या परीक्षा से वंचित करने जैसी बातें कही जाती हैं, जिससे छात्र और अभिभावक दबाव में आ जाते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ मामलों में भुगतान की रसीद भी स्पष्ट रूप से नहीं दी जा रही है। संबंधित लेन-देन के स्क्रीनशॉट भी सामने आए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि निर्धारित शुल्क से अधिक राशि ली जा रही है। अभिभावकों ने इसे “शिक्षा के नाम पर अवैध वसूली” करार दिया है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा शुल्क स्पष्ट रूप से निर्धारित होता है और उससे अधिक वसूली नियमों का उल्लंघन है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे संस्थानों की जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही एक शिकायत हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए, ताकि छात्र सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकें और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और छात्रों को राहत कब तक मिलती है।









