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साहित्य-साधना के अमर पुरोधा, हिंदी के यशस्वी उपन्यासकार अमृतलाल नागर जी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन

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हिंदी साहित्य के प्रख्यात उपन्यासकार अमृतलाल नागर जी की पुण्यतिथि पर हम उनके अद्वितीय साहित्यिक योगदान को श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण करते हैं। वे हिंदी साहित्य के उन विरले रचनाकारों में थे, जिन्होंने अपने लेखन के माध्यम से भारतीय समाज, संस्कृति, इतिहास और लोकजीवन को अत्यंत सजीव रूप में प्रस्तुत किया।

अमृतलाल नागर जी का जन्म 17 अगस्त 1916 को हुआ था। उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक, रेडियो नाटक तथा संस्मरण जैसी विविध विधाओं में लेखन किया। उनका साहित्य मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक यथार्थ और ऐतिहासिक दृष्टि से परिपूर्ण है। वे आम जनमानस के लेखक थे, जिन्होंने समाज के हर वर्ग की भावनाओं और संघर्षों को अपनी लेखनी से अभिव्यक्ति दी।

उनकी प्रमुख कृतियों में Manas Ka Hans, Boond Aur Samudra, Nachyo Bahut Gopal और Amrit Aur Vish विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन रचनाओं में भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों का गहन चित्रण मिलता है।

उनकी भाषा सरल, प्रवाहमयी और हृदयस्पर्शी थी। उन्होंने साहित्य को केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज सुधार और जागरूकता का माध्यम बनाया।

अमृतलाल नागर जी की पुण्यतिथि हमें उनके आदर्शों और साहित्यिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती है। हिंदी साहित्य में उनका योगदान सदैव अमर रहेगा।

 

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