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सरकार की संवेदनशील, मगर आक्रामक रणनीति से नक्सलमुक्त हो रहा बस्तर

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

बस्तर संभाग में 5 साल में 4 हजार नक्सलियों ने किया है आत्मसमर्पण 
मुठभेड़ों में मारे गए 596 नक्सली, गिरफ्त में आए 3063, बरामद किए गए 1187 हथियार 

जगदलपुर। केंद्र और राज्य की सरकारों की संवेदनशील, मगर आक्रामक रणनीति के चलते बस्तर संभाग तेजी से नक्सलमुक्त हो रहा है। इसी के साथ यहां की खूबसूरत वादियों में तरक्की की
शानदार बयार भी बहने लगी है, रिमोट एरिया के गांवों में भी बुनियादी सुविधाएं पहुंचने लगी हैं और ग्रामीणों के चेहरों की रौनक लौट आई है।
केंद्र की मोदी सरकार और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश को माओवाद मुक्त करने का जो संकल्प ले रखा है, उसे मूर्तरूप देने में छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार फलीभूत करने में जमीनी तौर पर पहल कर रही है। केंद्र सरकार ने जहां सुरक्षा बलों को एंटी नक्सल ऑपरेशन के लिए फ्री हैंड कर कड़े तेवर दिखाने की खुली छूट दे रखी है, वहीं छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने संवेदनशील कदम उठाए हैं। नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास के लिए बनाई गई योजना नक्सलियों को खूब पसंद आ रही है। वहीं आक्रामक रणनीति से नक्सलियों की कमर टूट चुकी है। केंद्र में जबसे भाजपा की सरकार आई है, नक्सल उन्मूलन के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत लगातार काम किया जा रहा है। वर्ष 2021 से 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ जाहिर होता है कि संवेदनशीलता और दृढ़ इच्छाशक्ति से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है, बड़ी से बड़ी जंग भी जीती जा सकती है। स्तर संभाग में इन पांच सालों के दौरान सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कुल 447 मुठभेड़ें हुईं, जिनमें 596 नक्सली मारे गए। इस अवधि में कुल 3063 नक्सली गिरफ्तार किए गए और 1187 हथियार बरामद किए गए। वहीं राज्य एवं केंद्र सरकार की संवेदनशील
पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 4 हजार से भी ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। ये नक्सली समाज और विकास की मुख्यधारा से जुड़कर अब खुशहाल जीवन गुजार रहे हैं।

आईजी की तल्ख चेतावनी
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने शेष बचे नक्सलियों को तल्ख लहजे में चेतावनी दी है जो नक्सली बचे रह गए हैं, वे जल्द सरेंडर कर मुख्यधारा से जुड़ जाएं अन्यथा मुठभेड़ में मारे जाएंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग में महज 100 नक्सली ही बचे हैं, जो जंगलों में भागते फिर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पापाराव जैसे दो चार बड़े नक्सली रह गए हैं। इन नक्सलियों के खिलाफ लगातार सर्च ऑपरेशन जारी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा 31 मार्च तक माओवाद के सफाये के लिए जो समय सीमा तय की गई है, उस पर तेजी से काम चल रहा है और अब बस्तर तेजी से नक्सलमुक्त हो रहा है।आईजी ने कहा कि बस्तर के लोग दो दशक से नक्सलियों का आंतक सहते आए हैं। उनके कारण दूरस्थ अंचलों में विकास नहीं पहुंच पाया था। उन्होंने कहा कि जनता की मंशा के अनुरूप विकास कार्यों में तेजी लाने एवं नक्सलियों के आंतक से बस्तर की जनता को मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से केंद्र एवं राज्य सरकार के मार्गदर्शन में बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा जिले में वर्ष 2025-2026 में 58 सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं। जिससे पुलिस जवानों को ऑपरेशन संचालित करने में मदद मिली है और अब बस्तर नक्सल मुक्ति की ओर आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के गृहमंत्री नक्सल प्रभावित इलाकों में दौरा कर जवानों के मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ विकास को गति देने में जुटे हैं। आईजी ने बताया कि कैम्प को स्थापना के बाद से वर्ष 2021 से 2026 तक लगातार नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी रहा। जिसे सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी मिली है। इन वर्षों में 447 मुठभेड़ में जवानों ने 600 नक्सलियों को मार गिराया है जिसमें कई बड़े नक्सली भी शामिल हैं। ऑपरेशन के दौरान 3063 नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं और लगभग 4 हजार से अधिक नक्सली हथियान छोड़ कर मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। नक्सलियों से 1187 हथियार भी बरामद किए गए हैं।

विकास, विश्वास और रोजगार पर जोर
शासन की कल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, बुनियादी ढांचे के विस्तार तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसरोंको सुदृढ़ करने हेतु स्थानीय प्रशासन द्वारा ज्यादा फोकस किया जा रहा है। जन सहभागिता संवाद और सामाजिक समरसता के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बस्तर भय और हिंसा के अतीत के पीछे छोड़ते हुए शांति प्रगति और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर हो। नियदनेल्लानार योजना…

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