हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन मां दुर्गा की उपासना, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष महत्व रखता है। जहां शारदीय और चैत्र नवरात्रि की अष्टमी व्यापक रूप से प्रसिद्ध है, वहीं मासिक दुर्गा अष्टमी वर्ष के बारहों महीनों में भक्तों को नियमित रूप से शक्ति आराधना का अवसर प्रदान करती है।
धार्मिक महत्व
मासिक दुर्गा अष्टमी को मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। यह तिथि देवी की कृपा प्राप्त करने, कष्टों के निवारण और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
पूजा-विधि
इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पूजा की जाती है। लाल पुष्प, चुनरी, अक्षत, कुमकुम और नारियल अर्पित किए जाते हैं।
कई भक्त व्रत रखते हैं और दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करते हैं। शाम को आरती और प्रसाद वितरण के साथ व्रत का पारण किया जाता है।
आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश
मासिक दुर्गा अष्टमी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का माध्यम है। यह दिन नारी शक्ति के सम्मान और जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है। नियमित रूप से मां की आराधना करने से मन में शांति, आत्मविश्वास और साहस का विकास होता है।









